छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव अभी करीब दो साल दूर हैं, लेकिन राजनीतिक दलों के भीतर हलचल तेज होने लगी है. खासकर बीजेपी के संगठन में पिछले दो महीनों के दौरान सामने आए इस्तीफों ने स्थानीय स्तर पर चल रही नाराजगी को चर्चा में ला दिया है. 27 जुलाई से 17 सितंबर के बीच डोंगरगढ़, खैरागढ़ और रायगढ़ से जुड़े मामलों में कुल 156 नेताओं, पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के पार्टी से अलग होने की बात सामने आई है. इनमें सामूहिक इस्तीफे भी शामिल हैं.
डोंगरगढ़ में 111 कार्यकर्ताओं ने एक साथ छोड़ी सदस्यता
बीजेपी में असंतोष का सबसे बड़ा मामला 27 जुलाई को डोंगरगढ़ में सामने आया. शहर भाजपा मंडल से जुड़े 111 सदस्यों ने एक साथ पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया. कार्यकर्ताओं ने संगठन की कार्यशैली पर सवाल उठाए और मंडल अध्यक्ष जसमीत सिंह बन्नौआना के कामकाज को लेकर नाराजगी जाहिर की.
इस्तीफा देने वाले कार्यकर्ताओं की ओर से आरोप लगाया गया कि लंबे समय से पार्टी के लिए सक्रिय रहे वरिष्ठ कार्यकर्ताओं को संगठन में अपेक्षित महत्व नहीं मिल रहा. कुछ लोगों ने गुटबाजी और चुनिंदा लोगों के प्रभाव की बात भी कही.
चार दिन बाद 26 और पदाधिकारियों ने दिया इस्तीफा
डोंगरगढ़ में मामला यहीं नहीं रुका. 31 जुलाई को 26 अन्य पदाधिकारियों और नेताओं ने भी बीजेपी की प्राथमिक सदस्यता छोड़ दी. उन्होंने अपना इस्तीफा भाजपा जिलाध्यक्ष कोमल सिंह राजपूत को सौंपा. इस्तीफा पत्र में परिवारवाद, गुटबाजी और पुराने कार्यकर्ताओं की कथित उपेक्षा जैसे मुद्दे उठाए गए.
इस सूची में पूर्व भाजयुमो मंडल अध्यक्ष सुमित मिश्रा, पूर्व महिला मोर्चा अध्यक्ष एम. तुलसी और भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के जिला मंत्री बलविंदर सिंह भाटिया समेत कई नाम शामिल बताए गए. इस तरह चार दिनों के भीतर डोंगरगढ़ में 137 लोगों के इस्तीफे सामने आए.
मंत्री के बड़े भाई ने थामा कांग्रेस का हाथ
11 सितंबर को राजनीतिक चर्चा को उस समय और हवा मिली, जब कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब के बड़े भाई गुरु ढालदास साहेब कांग्रेस में शामिल हो गए. पोरा तिहार के कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने उन्हें कांग्रेस की सदस्यता दिलाई. सतनामी समाज में पहचान रखने वाले गुरु ढालदास साहेब के इस कदम को दोनों दलों के राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनाया गया.
खैरागढ़ और रायगढ़ में भी सामने आई नाराजगी
17 सितंबर को खैरागढ़ के पाड़ादाह भाजपा मंडल से जुड़े छह बूथ अध्यक्षों समेत 11 पदाधिकारियों ने इस्तीफा दिया. उन्होंने रायपुर पहुंचकर प्रदेश महामंत्री नवीन मारकंडे को इस्तीफा सौंपा. पदाधिकारियों ने मंडल अध्यक्ष की कथित कार्यशैली और पक्षपात को लेकर नाराजगी जताई. हालांकि मंडल अध्यक्ष गोरेलाल वर्मा और भाजपा जिलाध्यक्ष डॉ. बिशेसर साहू ने इस्तीफों की औपचारिक जानकारी होने से इनकार किया.
इसी दिन रायगढ़ के पुसौर नगर पंचायत में आठ बीजेपी पार्षदों ने भी सामूहिक इस्तीफे की पेशकश की. पार्षदों ने पानी, बिजली, सड़क और नाली जैसी मूलभूत समस्याओं के समाधान में देरी का मुद्दा उठाया. उनका कहना था कि स्वीकृत विकास कार्यों की रफ्तार कम होने से उन्हें जनता के सवालों का सामना करना पड़ रहा है.
चुनाव से पहले संगठन के सामने चुनौती
लगातार सामने आए इन मामलों ने बीजेपी के स्थानीय संगठन के सामने कई सवाल जरूर खड़े किए हैं. हालांकि हर मामले में नाराजगी की वजह अलग बताई गई है, लेकिन संगठन की कार्यशैली, गुटबाजी, कथित उपेक्षा और स्थानीय विकास जैसे मुद्दे बार-बार सामने आए हैं. अब देखना होगा कि बीजेपी इन शिकायतों पर किस तरह की कार्रवाई करती है और आने वाले समय में कांग्रेस इन घटनाक्रमों को किस तरह राजनीतिक मुद्दे के तौर पर उठाती है.







