लखनऊ/खबर डिजिटल/ भाजपा ने उत्तर प्रदेश की राज्यसभा सीटों के लिए उम्मीदवारों के चयन में इस बार बड़ा बदलाव दिखाई दिया है। पार्टी ने 8 नामों की घोषणा की है, जिनमें धर्मपाल सिंह, राधाकांत ओझा, प्रकाश पाल, विद्यासागर सोनकर, गोपी कृष्ण पांडेय, प्रियंका सिंह रावत, राम प्रताप सिंह चौहान और श्रुति गंगवार शामिल हैं। खास बात यह है कि पार्टी ने मौजूदा आठों BJP राज्यसभा सदस्यों को दोबारा मौका नहीं दिया। इनमें केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और बीएल वर्मा जैसे नाम भी शामिल हैं।
तीन अक्टूबर की बैठक से शुरू हुई अंतिम कवायद?
पार्टी के अंदर उम्मीदवारों के चयन को लेकर अंतिम दौर की हलचल तीन अक्टूबर की भाजपा संसदीय बोर्ड की वर्चुअल बैठक से जोड़कर देखी जा रही है। इस बैठक में अचानक एक प्रमुख नेता के जुड़ने को भी महत्वपूर्ण माना गया। हालांकि, बैठक में किस नाम पर क्या चर्चा हुई और किस स्तर पर कौन-सा निर्णय लिया गया, इसकी आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
अखिलेश के फॉर्मूले से अलग BJP की रणनीति
राज्यसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी की ओर से परिवार और धनराज जैसे नामों को आगे किए जाने के बीच भाजपा ने अपने उम्मीदवार चयन में अलग तरह का सामाजिक और संगठनात्मक संतुलन साधने की कोशिश की है। पार्टी की सूची में संगठन से जुड़े नेताओं के साथ अलग-अलग सामाजिक वर्गों और क्षेत्रों को प्रतिनिधित्व दिया गया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, भाजपा की शुरुआती कवायद में करीब 20 से ज्यादा नामों पर विचार किया गया था। अंतिम सूची में संगठन और जमीनी राजनीति से जुड़े चेहरों को प्राथमिकता मिली।
संत प्रेमानंद के शिष्य दुलारी शरण के साथ ऐसी हैवानियत… डॉक्टरों ने दी चौंकाने वाली जानकारी
लखनऊ से लेकर दिल्ली तक मंथन
उम्मीदवारों के चयन को लेकर प्रदेश स्तर से केंद्रीय नेतृत्व तक लगातार मंथन चला। रिपोर्टों में यह भी सामने आया कि प्रदेश पैनल में कई बड़े नाम शामिल थे, लेकिन अंतिम सूची में पार्टी ने संगठनात्मक और सामाजिक समीकरणों को ज्यादा महत्व दिया।
आठों नामों में दिखा सामाजिक-संगठनात्मक संतुलन
भाजपा की घोषित सूची में तीन OBC, दो अनुसूचित जाति और तीन सामान्य वर्ग के उम्मीदवार शामिल हैं। दो महिला उम्मीदवारों को भी जगह दी गई है। इस तरह सूची में जातीय प्रतिनिधित्व के साथ संगठनात्मक अनुभव और क्षेत्रीय संतुलन का संयोजन दिखाई देता है। इस पूरी कवायद का सबसे बड़ा संदेश यह माना जा रहा है कि भाजपा ने इस बार सिर्फ चर्चित चेहरों के बजाय संगठन और सामाजिक समीकरणों से जुड़े नेताओं को राज्यसभा भेजने का रास्ता चुना है। हालांकि, किस स्तर पर किस नेता की सहमति से कौन-सा नाम अंतिम हुआ, इसकी पूरी जानकारी पार्टी ने सार्वजनिक नहीं की है।
प्रेमानंद महाराज के शिष्य की मौत का गहराया रहस्य! कमरे में मिला ग्राइंडर, प्राइवेट पार्ट पर चोट के निशान







