समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने साफ किया है कि उनकी पार्टी अपने सहयोगियों का साथ नहीं छोड़ेगी. उन्होंने कहा कि सपा की राजनीतिक लड़ाई भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ है और पार्टी अपने गठबंधन को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है. 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा कांग्रेस के नेतृत्व वाले इंडिया गठबंधन का हिस्सा रही थी. अब दोनों दलों की ओर से 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को साथ मिलकर लड़ने की बात लगातार कही जा रही है.
गठबंधन को लेकर अखिलेश ने साफ किया रुख
सपा मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत के दौरान अखिलेश यादव ने कहा कि समाजवादी पार्टी ने कभी गठबंधन तोड़ने की राजनीति नहीं की. उनका कहना था कि जब पार्टी किसी सहयोगी के साथ आगे बढ़ती है तो पूरी मजबूती से उसके साथ खड़ी रहती है. अखिलेश ने कहा कि समाजवादी विचारधारा से जुड़े लोगों ने हमेशा अपने वादे निभाए हैं. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आने वाले समय में भाजपा के खिलाफ विपक्षी एकजुटता को मजबूत करना उनकी पार्टी की प्राथमिकता रहेगी.
योगी के बयान पर अखिलेश का पलटवार
अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पीडीए को लेकर दिए गए बयान पर भी प्रतिक्रिया दी. योगी ने सपा के ब्राह्मणों को साधने की कोशिश का जिक्र करते हुए पीडीए की परिभाषा को लेकर अखिलेश पर निशाना साधा था. इसके जवाब में सपा प्रमुख ने कहा कि शब्दों के साथ खेलने से किसी राजनीतिक दल की विचारधारा नहीं बदल जाती. उन्होंने दावा किया कि भाजपा पीडीए की बढ़ती ताकत से परेशान है और इसी वजह से इस मुद्दे की अलग अलग व्याख्या की जा रही है.
सामाजिक न्याय को बताया पार्टी का लक्ष्य
अखिलेश ने कहा कि सपा का उद्देश्य समाजवादी विचारधारा के आधार पर सामाजिक न्याय वाली सरकार बनाना है. उन्होंने पीडीए यानी पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक वर्गों को अपनी राजनीति का अहम आधार बताया. सपा प्रमुख ने कहा कि जितना अधिक इन वर्गों के मुद्दों को दबाने की कोशिश होगी, उतना ही पीडीए मजबूत होगा. उन्होंने भाजपा पर अलग अलग समुदायों के साथ भेदभाव और अन्याय करने का आरोप भी लगाया.
महंगाई और चीनी की कीमत पर सरकार को घेरा
अखिलेश यादव ने बढ़ती महंगाई को लेकर भी सरकार पर हमला बोला. उन्होंने कहा कि त्योहारों का मौसम नजदीक आते ही रोजमर्रा की जरूरी चीजों की कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है. पेट्रोल, डीजल और अन्य सामान महंगे होने का जिक्र करते हुए उन्होंने चीनी की बढ़ती कीमत पर सवाल उठाया. उन्होंने गन्ने से एथनॉल बनाने की नीति पर भी सवाल खड़े किए. अखिलेश ने पूछा कि एथनॉल और चीनी से होने वाले मुनाफे का फायदा आखिर किसे मिल रहा है.
15 करोड़ लोगों को राशन मिलने पर सवाल
पूर्व मुख्यमंत्री ने सरकार के प्रति व्यक्ति आय बढ़ने के दावे पर भी सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि अगर लोगों की आर्थिक स्थिति बेहतर हुई है तो आज भी करीब 15 करोड़ लोगों को सब्सिडी वाला राशन क्यों देना पड़ रहा है. अखिलेश ने पूछा कि जिन गरीब लोगों को सरकारी राशन की जरूरत पड़ रही है, उनकी वास्तविक प्रति व्यक्ति आय कितनी है. उन्होंने सरकार के आर्थिक दावों को जमीनी हालात के आधार पर परखने की बात कही.
सहयोगियों को ज्यादा सीट देने की बात
सीट बंटवारे को लेकर अखिलेश यादव ने कहा कि सपा अपने सहयोगी दलों को पहले की तुलना में अधिक सीटें देने के पक्ष में है. उन्होंने कहा कि गठबंधन में शामिल दलों को पिछली व्यवस्था के मुकाबले करीब चार गुना ज्यादा सीटें मिलनी चाहिए.
महिलाओं के लिए आर्थिक सहायता योजनाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने दावा किया कि सपा पहले ही 40 हजार रुपये की मदद का ऐलान कर चुकी थी और अब भाजपा भी इसी तरह के वादे कर रही है.
शिक्षा और पत्रकारिता पर भी सरकार को घेरा
अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश की प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि सरकारी प्राथमिक स्कूलों की व्यवस्था को कमजोर किया जा रहा है, जबकि पिछड़े वर्गों के बच्चों की बड़ी संख्या इन्हीं स्कूलों में पढ़ती है.
उन्होंने कहा कि सत्ता में आने पर सपा सरकारी स्कूलों की स्थिति सुधारने और बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने पर ध्यान देगी.
पत्रकारिता के मुद्दे पर अखिलेश ने कहा कि मौजूदा दौर में सच बोलना आसान नहीं रह गया है. उनका आरोप था कि पत्रकारों पर दबाव है और सच सामने रखने वालों को मुश्किलों का सामना करना पड़ता है.
परिवारवाद पर भी अखिलेश ने रखी अपनी बात
सपा सांसदों के पार्टी से अलग होने की खबरों पर प्रतिक्रिया देते हुए अखिलेश ने परिवारवाद को लेकर भी अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि राजनीति में परिवार के कई सदस्यों का साथ होना कभी कभी संगठन के लिए फायदेमंद भी साबित हो सकता है. उन्होंने सपा के कई सांसदों के एक ही परिवार से होने का उदाहरण देते हुए कहा कि इसके बावजूद पार्टी में बड़ी टूट नहीं हुई. अखिलेश ने कहा कि पार्टी के पास मुस्लिम सांसदों और प्रतिबद्ध समाजवादियों का भी मजबूत आधार रहा है, जिसने संगठन को एकजुट रखने में भूमिका निभाई.
