छिंदवाड़ा/सुनील बंशीवाल/खबर डिजिटल/ मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ छिंदवाड़ा के परासिया पहुंचे। उन्होंने जहरीले कफ सिरप से मृत बच्चों के परिजनों से मिलकर मदद का आश्वासन दिया। कमलनाथ ने सरकार से सभी पीड़ित परिजनों को 1 करोड़ के मुआवाजे की मांग रखी। इस दौरान उनके साथ पूर्व सांसद नकुलनाथ भी मौजूद थे।
मुख्यमंत्री से चर्चा करेंगे कमलनाथ
पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि ‘सरकार ने पीड़ितों को 4-4 लाख रुपए मुआवजा राशि देने का ऐलान किया है, जो काफी कम है, जिस परिवार का बेटा इस दुनिया में नहीं रहा है, उसकी भरपाई मुआवजे से नहीं की जा सकती, लेकिन कम से कम परिवार को राहत मिल सके इतना मुआवजा तो देना चाहिए।” उन्होंने कहा कि ‘मैंने पहले भी पत्र लिखकर 1 करोड़ रुपए प्रति परिवार को मुआवजा देने की बात कही है, क्योंकि इलाज में ही परिजनों का 15 से 20 लाख रुपए खर्च हो चुका है।’
कमलनाथ ने जताया गहरा दुख
पूर्व सीएम कमलनाथ ने परासिया में किडली फेलियर से मृत बच्चों के परिजन से मुलाकात कर कहा कि वो यहां आने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे थे। इसके बाद उन्होंने मृत बच्चों के परिजनों से एक-एक करके मुलाकात की और उन्हें हर संभव मदद का आश्वासन दिया। इस दौरान पत्रकारों से बातचीत करते हुए कांग्रेस नेता कमलनाथ ने कहा, कि ‘मैं सरकार से बात करता रहा कि आप क्या टेस्ट कर रहे हैं?, लेकिन बाद में जब जांच हुई तो पता चला की दवाइयां में जहरीला तेल है।’ साथ ही निशाना साधा कि कितनी दवाइयां हैं, जिनमें जहरीला तेल मिला हुआ है, पांच प्रतिशत दवाओं की भी टेस्टिंग नहीं होती है।
‘बच्चों की मौत के लिए सरकार जिम्मेदार’
कमलनाथ ने कहा, ‘जहरीली कफ सिरप पीने के बाद जो बच्चों की मौत हुई है, उसकी जिम्मेदार मध्य प्रदेश सरकार है, क्योंकि दवाइयों की जो टेस्टिंग होनी चाहिए, वह प्रॉपर नहीं हो रही है। यहां एक साथ कई बच्चों ने अपनी जान गंवाई है, जिससे कफ सिरप में खराबी के बारे में पता चला सका. इसके अलावा भी कई ऐसी दवाइयां हैं, जिसकी आज भी जांच नहीं हो रही है।
सीएम डॉ. मोहन यादव ने साधा था निशाना
बच्चों की मौत के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, स्वास्थ्य मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला, मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी, विधानसभा नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार सहित कई अन्य नेता पीड़ितों के परिजनों से मुलाकात कर चुके हैं। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने नागपुर के अस्पताल में पहुंचकर एडमिट बच्चों की हालचाल जाना, और उनके परिजनों से भी चर्चा की थी। उस समय मुख्यमंत्री ने कहा था कि ‘दुख की घड़ी है, ऐसे समय में कमलनाथ को यहां की चिंता करनी चाहिए।’


