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Friday, April 17, 2026
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मझगवां फ्लाई ओवर ब्रिज की हालत बदहाल: करोड़ों की लागत से बना पुल कुछ वर्षों में ही बर्बादी की कगार पर, प्रशासन की लापरवाही और भ्रष्टाचार पर उठे सवाल

मझगवां फ्लाई ओवर ब्रिज की हालत बदहाल: करोड़ों की लागत से बना पुल कुछ वर्षों में ही बर्बादी की कगार पर, प्रशासन की लापरवाही और भ्रष्टाचार पर उठे सवाल

कटनी – मझगवां क्षेत्र में बने करोड़ों रुपए की लागत वाले फ्लाई ओवर ब्रिज की हालत आज बेहद चिंताजनक है। यह ब्रिज, जो कुछ ही वर्षों पूर्व जनता की सुविधा के लिए बड़े दावों और शोर-शराबे के साथ तैयार किया गया था, अब जगह-जगह दरारों और खतरनाक गड्ढों से जर्जर हो चुका है।

अब मरम्मत कार्य प्रारंभ जरूर हुआ है, लेकिन यह भी “ऊपरी लीपापोती” जैसा प्रतीत हो रहा है, क्योंकि मरम्मत के बजाय प्रशासन गड्ढों में सिर्फ डामर भरवाकर कार्य की खानापूर्ति कर रहा है।
स्थानीय नागरिकों में भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि जब यह ब्रिज बना था, तब करोड़ों की लागत दिखाई गई थी, लेकिन निर्माण की गुणवत्ता इतनी घटिया थी कि महज कुछ वर्षों में ही ब्रिज बर्बाद हो गया। इससे साफ जाहिर होता है कि निर्माण कार्य में भारी भ्रष्टाचार हुआ है और शासन-प्रशासन की मिलीभगत से जनता के टैक्स के पैसे की खुली लूट की गई।
न कोई जांच, न कोई कार्रवाई – आखिर किसे बचाया जा रहा है?
सबसे गंभीर सवाल यह है कि अब तक इस घटिया निर्माण की जांच क्यों नहीं करवाई गई?
न तो ठेकेदार पर कोई कार्रवाई हुई, न निर्माण एजेंसी से जवाब-तलब किया गया। शासन-प्रशासन की चुप्पी इस पूरे मामले को संदिग्ध बना रही है।
कई स्थानीय समाजसेवियों और जनप्रतिनिधियों ने मांग की है कि इस पूरे निर्माण कार्य की उच्च स्तरीय तकनीकी जांच करवाई जाए और दोषी अधिकारियों, इंजीनियरों और ठेकेदारों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
हर दिन जान जोखिम में डाल रहे हैं राहगीर
इस ओवर ब्रिज से हर दिन सैकड़ों वाहन गुजरते हैं, लेकिन गड्ढों के कारण आए दिन दुर्घटनाएं होती हैं। स्कूली बसों, दोपहिया वाहनों और एंबुलेंस को भी इससे गुजरते समय परेशानी का सामना करना पड़ता है। यह लापरवाही किसी दिन किसी बड़ी जनहानि का कारण बन सकती है।

जनता पूछ रही है – क्या यही है ‘विकास’ का सच?
शासन द्वारा बड़े-बड़े विकास के दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत मझगवां ओवर ब्रिज जैसे उदाहरणों से उजागर हो रही है। यदि समय रहते कड़ी जांच नहीं हुई, तो ऐसे भ्रष्टाचार और लापरवाही की कीमत आने वाली पीढ़ियों को चुकानी पड़ेगी।
क्या प्रशासन जागेगा? या फिर एक और हादसे का इंतजार रहेगा?

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