Harda News/ नौशाद खान/ खबर डिजिटल/ हद कर दी आपने! ये फिल्मी गीत तो आपने सुना ही होगा। जी हां ! सागौन कटाई से जुड़े इस मामले में सारी हदें पार की गई हैं। कुछ लोग नियमों को ताक में रखकर मनमर्जी से काम कर रहे हैं, लेकिन हैरानी तो तब होती है कि जब जिम्मेदार सरपंच सचिव भी आंखों पर पट्टी बांधे हुए बैठे है। कुछ ऐसा ही एक मामला हरदा जिले की ग्राम पंचायत गोदागांवखुर्द का सामने आया, जहां एक कृषक जया पिता जगदीश राजपूत के द्वारा ग्राम पंचायत का फर्जी अनुमति पत्र लेटर पेड लगाकर करोड़ों रुपये मूल्य की सागौन की अवैध कटाई कर ली, और शासन प्रशासन को चूना लगा दिया। फिलहाल राजस्व विभाग, वन विभाग ने उक्त सागौन का पंचनामा बनाकर बना लिया है, देखना होगा कि अमानत में खयानत करने वाले लोगों पर कब तक FIR दर्ज होगी।
जनपद पंचायत उपाध्यक्ष ने की शिकायत
इस मामले में जब जनपद पंचायत टिमरनी के उपाध्यक्ष अनिल वर्मा ने शिकायत की तो पूरा मामला उजागर हु। अगर शिकायत नहीं होती तो करोड़ों रुपये के बेशकीमती मूल्य के सागौन बिक भी गए होते। फिलहाल मामला जांच में चल रहा है।
पटवारी ने की मामले की जांच
इधर चर्चा में हल्का पटवारी गौरीशंकर व्यालसे ने कहा कि अवैध सागौन की कटाई हुई है। लगभग तीन सौ पेड़ों की कटाई का मामला है। जांच रिपोर्ट अनुविभागीय अधिकारी टिमरनी को सौंपी है।अग्रिम कार्यवाही उनके द्वारा की जायेगी।
क्या कहते हैं ग्राम सरपंच और सचिव
वहीं इस मामले में ग्राम पंचायत सरपंच मिथलेश राजपूत सचिव मेघा अटूटे की भूमिका भी संदिग्ध है। फिलहाल पूरे मामले में बचाव करते हुए सरपंच पति ने अपने बयान में कहा कि हमारे द्वारा कोई अनुमति नहीं दी गई। ऐसे में सवाल उठता है कि किसान जया पिता जगदीश राजपूत के द्वारा फर्जी लेटरपेड सरपंच सचिव का बताया गया, क्या वो क्या फर्जी है? अगर फर्जी है। तो अभी तक सरपंच सचिव के द्वारा संबंधित के खिलाफ कोई शिकायत थाने में दर्ज क्यों नहीं कराई गई ?
अवैध सागौन की कटाई हुई – पंचायत इंस्पेक्टर
इस मामले में जनपद पंचायत टिमरनी के पंचायत इंस्पेक्टर राकेश शर्मा का कहना है कि अवैध सागौन की कटाई हुई है। हमने वन विभाग ओर राजस्व को भी शिकायत के लिए पत्र लिखा है। वहीं ग्राम पंचायत को कार्रवाई करने का अधिकार है। सागौन की कटाई की अनुमति ऑनलाइन पोर्टल से लेना पड़ता है।
विधिवत अनुमति का किया दावा
खेत मालिक महिला कृषक के भाई दिग्विजय तोमर ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि हमने ग्राम पंचायत से विधिवत अनुमति ली है। अनुमति ऑफलाइन है। शिकायत कर्ता ने झूठी शिकायत की है।
हैरानी की बात यह है कि अब सवाल उठता हे कि कब जांच होगी, क्योंकि सागौन की कटाई हुए लगभग एक साल होने को है।
क्या है प्रक्रिया?
पूर्व में लोकवानिकी द्वारा सागौन काटने की अनुमति दी जाती थी। नए प्रावधान के अनुसार पंचायत स्तर पर ऑनलाइन दर्पण पोर्टल पर यह अनुमति लेना आवश्यक है। ग्राम पंचायत की मिलीभगत का यह आलम है कि अनुमति लेने वाले और देने वाले दोनों ही चुप हैं। दर्पण पोर्टल पर पर्दा डालकर ये दोनों पार्टियों की आपसी मौन सहमति से जुड़ा मामला दिख पड़ता है। जांच होने पर सही तथ्य सामने आ पाएंगे।


