भोपाल/सुनील बंशीवाल/खबर डिजिटल/ मध्यप्रदेश बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष का पद संभालने के तीन महीने से ज्यादा दिन के बाद हेमंत खंडेलवाल ने अपनी कार्यकारिणी को घोषणा कर दी, इसमें कई समीकरणों को साधकर उन्होंने संगठन क्षमता को पेश किया। वीडी शर्मा की कार्यकारिणी के नामों को भी आगे बढ़ाया, जिनको लेकर माना जा रहा था कि अबकी बार करीब-करीब पूरी कार्यकारिणी ही बदली नजर आएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। बात करें मोर्चों की तो इसमें बदलाव साफतौर पर देखा गया, और उसमें भी अनुभव और संघ के प्रभाव की झलक दिखाई दी। जिसमें सबसे खास किसान मोर्चा रहा।
वीडी शर्मा से बिल्कुल अलग टीम
पूर्व अध्यक्ष वीडी शर्मा ने अपनी टीम में 15 प्रदेश उपाध्यक्ष, 5 प्रदेश महामंत्री और 12 प्रदेश मंत्री बनाए थे। लेकिन अबकी बार इनकी संख्या को घटा दिया गया, पिछली बार माना जा रहा था कि सिंधिया खेमे के आने के बाद संख्या को बढ़ाया था। जिसे इस बार घटा दिया गया। हेमंत खंडेलवाल की टीम में केवल 9 उपाध्यक्ष, 4 प्रदेश महामंत्री और 9 प्रदेश मंत्री रखे गए हैं। इसी तरह इस बार सह कोषाध्यक्ष भी किसी को नहीं बनाया गया है।
संघ से जुड़े नेताओं को दी तवज्जो
RSS के शताब्दी वर्ष में माना जा रहा था कि इस साल बीजेपी में संघ के नेताओं की बंपर आमद होगी, जिसकी तस्वीर हेमंत खंडेलवाल की कार्यकारिणी से साफ हो गई। एमपी बीजेपी की नई टीम में संघ से जुड़े जिन नेताओं को मौका दिया गया है, उनमें शैलेन्द्र बरूआ, श्याम महाजन, निशांत खरे, श्याम महाजन, नंदिता पाठक, सुरेन्द्र शर्मा, जयपाल सिंह चावड़ा प्रमुख हैं। इनमें श्याम महाजन, शैलेन्द्र बरूआ और जयपाल सिंह पूर्व में संगठन मंत्री रह चुके हैं। विधानसभा चुनाव 2023 में प्रदेश उपाध्यक्ष बनाई गईं नंदिता पाठक भी टिकट की दावेदार थीं। वे संघ की बेहद नजदीकी हैं। उनके पति भरत पाठक भी लंबे समय से संघ और उससे जुड़े अनुषांगिक संगठनों में महत्वपूर्ण पदों पर काम कर रहे हैं।
कई नेताओं का हुआ प्रमोशन
हेमंत खंडेलवाल ने अपनी कार्यकारिणी में वीडी शर्मा के हटाए गए राजेन्द्र सिंह शामिल किया है। वे प्रदेश मंत्री बनाए गए हैं। राजेन्द्र सिंह को शिवराज सिंह चौहान का नजदीकी माना जाता है। इसी तरह छतरपुर की दो बाद नगरपालिका अध्यक्ष रही अर्चना सिंह को प्रदेश मंत्री बनाया गया है। अर्चना 2018 का विधानसभा चुनाव भाजपा के टिकट पर लड़ी थीं पर बेहद कम माार्जिन से हार का मुंह देखना पड़ा था। जहां पार्टी ने इस बार उनकी जगह फिर से ललिता यादव को टिकट दिया।इंदौर के प्रदेश उपाध्यक्ष बनाए गए डॉ. निशांत खरे पूर्व में युवा आयोग के अध्यक्ष रह चुके हैं। प्रभुलाल जाटवा पिछली कार्यकारिणी में प्रदेश मंत्री थे। इस बार उन्हें प्रमोट करते हुए उपाध्यक्ष बनाया गया है। पिछली बार प्रदेश महामंत्री रहे रणवीर सिंह रावत को इस बार उपाध्यक्ष पद दिया गया है। रजनीश अग्रवाल को महामंत्री बनाए जाने की चर्चा थी पर वे फिर से मंत्री पद पर यथावत रखे गए हैं। इसी तरह प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल को फिर से वहीं जिम्मेदारी से नवाजा गया, जिसके पीछे उनका बेहतर परफॉर्मेंस बताया जा रहा है।
सांसदों, विधायकों की संख्या में कमी
मध्यप्रदेश बीजेपी की नई टीम में सांसद और विधायकों को मौका इस बार भी दिया गया है, पर इनकी संख्या को घटा दिया गया है। सांसदों में केवल सागर की लोकसभा सांसद लता वानखेड़े और राज्यसभा सदस्य सुमेर सोलंकी को मौका मिला, तो विधायकों में प्रभुराम चौधरी और मनीषा सिंह को स्थान दिया गया है। बात करें वीडी शर्मा के कार्यकाल की तो उनकी टीम के अधिकांश साथी चुनाव जीतकर विधायक सांसद की कुर्सी पर विराजमान है, इसलिये उन्हें मौका नहीं दिया गया, जिसमें भगवानदास सबनानी शामिल हैं।
जातीय समीकरण को जमकर साधा
हेमंत की टीम में सोशल इंजीनियरिंग की झलक साफ दिखाई दी। SC/ST वर्ग को पूरा प्रतिनिधित्व मिला। दलित चेहरे के रुप में उज्जैन के प्रभुलाल जाटवा जोकि CM के करीबी हैं, वो उपाध्यक्ष बनाए गए। इंदौर के सांवेर से सालों से टिकट के दावेदार भगवान सिंह परमार को SC मोर्चा का अध्यक्ष बनाया गया है। जो 2028 में दलित वोटों को कांग्रेस से छीन सकते हैं। इसी तरह ST वर्ग से राज्यसभा सांसद सुमेर सोलंकी को महामंत्री, पंकज टेकाम को ST मोर्चा अध्यक्ष बनाया गया है। ओबीसी मोर्चा की जिम्मेदारी पवन पाटीदार को सौंपी गई है। महिला एंगल की बात करें तो सांसद लता वानखेड़े महामंत्री, मनीषा सिंह उपाध्यक्ष, नंदिता पाठक उपाध्यक्ष, संगीता सोनी मंत्री, अर्चना सिंह मंत्री, बबीता परमार मंत्री, राजो मालवीय मंत्री बनाई गई हैं। जिन्हें कार्यकारिणी में 25 प्रतिशत भागीदार दी गई है।
ऐसी है कार्यकारिणी, पदाधिकारी- दायित्व
रणवीर सिंह रावत– उपाध्यक्ष (पहले महामंत्री रहे)
कांतदेव सिंह — उपाध्यक्ष (पहले उपाध्यक्ष रहे)
प्रभुराम चौधरी– उपाध्यक्ष (सिंधिया समर्थक)
शैलेंद्र बरूआ– उपाध्यक्ष (संभागीय संगठन मंत्री रहे)
मनीषा सिंह — उपाध्यक्ष (पहले प्रदेश मंत्री रहीं)
नंदिता पाठक– उपाध्यक्ष
सुरेंद्र शर्मा– उपाध्यक्ष
निशांत खरे– उपाध्यक्ष
प्रभुलाल जाटव — उपाध्यक्ष
लता वानखेड़े– महामंत्री (पहले प्रदेश मंत्री रहीं)
सुमेर सिंह सोलंकी– महामंत्री (राज्यसभा सदस्य रहे)
राहुल कोठारी– महामंत्री (पहले मंत्री रहे जैन, अल्पसंख्यक)
गौरव रणदिवे– महामंत्री (इंदौर नगर अध्यक्ष रहे)
रजनीश अग्रवाल — मंत्री (पहले मंत्री रहे)
लोकेंद्र पाराशर– मंत्री (पहले मंत्री रहे)
जयदीप पटेल– मंत्री (पहले मंत्री रहे)
क्षितिज भट्ट– मंत्री (पहले मंत्री रहे)
संगीता सोनी– मंत्री (पहले मंत्री रही)
राजेंद्र सिंह — मंत्री अर्चना सिंह– मंत्री
राजो मालवीय– मंत्री (पहले प्रदेश प्रवक्ता रहीं)
बबीता परमार– मंत्री
सीए अखिलेश जैन– कोषाध्यक्ष (पद पर यथावत)
श्याम महाजन– कार्यालय मंत्री (प्रदेश उपाध्यक्ष थे)
आशीष अग्रवाल– मीडिया प्रभारी (पद पर यथावत)
जयपाल सिंह चावड़ा– किसान मोर्चा (संभागीय संगठन मंत्री रहे)
भगवान सिंह परमार– एससी मोर्चा
पंकज टेकाम – एसटी मोर्चा
पवन पाटीदार– पिछड़ा वर्ग मोर्चा


