झाबुआ /सुनील डाबी/खबर डिजिटल/ जिले के मेघनगर नगर में एक नाबालिग स्कूली छात्रा ने अपने साहस और विवेक से ऐसा उदाहरण पेश किया है, जो पूरे समाज के लिए प्रेरणा बन गया है। छात्रा ने छेड़खानी करने वाले युवक के खिलाफ न सिर्फ आवाज उठाई, बल्कि तत्काल कार्रवाई करवाकर यह साबित कर दिया कि अब बेटियाँ डरती नहीं, डटकर सामना करती हैं।
घटना जिसने शहर को हिलाया
जानकारी के अनुसार, मेघनगर के एक स्थानीय विद्यालय में पढ़ने वाली छात्रा के साथ एक युवक, रेहान पिता सद्दाम, ने छेड़खानी की घटना को अंजाम दिया। छात्रा ने इस हरकत का साहसपूर्वक विरोध किया और घर पहुंचकर पूरी घटना अपने परिजनों को बताई। जिसके बाद परिजनों के साथ हिन्दू संगठन के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने थाने के सामने धरना दे दिया और आरोपी को तत्काल गिरफ्तार करने की मांग की गई, वहीं माहौल बिगड़ता देख पुलिस अधीक्षक शिवदयाल सिंह स्वयं मौके पर पहुंचे और भरोसा दिलाया कि आरोपी को बख्शा नही जाएगा, और उचित कार्रवाई की जाएगी। परिजनों की शिकायत पर मेघनगर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी के खिलाफ पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) सहित अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया गया, और उसे गिरफ्तार कर लिया। वहीं मामले में आरोपी को न्यायालय में पेश किए जाने के बाद जेल भेज दिया गया।
पुलिस की जागरूकता मुहिम का असर
झाबुआ पुलिस द्वारा पिछले कुछ महीनों से ‘गुड टच-बैड टच’, महिला सुरक्षा, और आत्मरक्षा जागरूकता को लेकर चलाए जा रहे अभियानों का असर अब स्पष्ट दिखने लगा है। स्कूलों और कॉलेजों में आयोजित नुक्कड़ नाटक, कार्यशालाएं और जनजागरण कार्यक्रमों ने छात्राओं में आत्मविश्वास और जागरूकता की भावना को बढ़ाया है। मेघनगर की इस छात्रा की तत्परता इस बात का प्रमाण है कि समाज में अब चुप्पी नहीं, बल्कि न्याय की आवाज बुलंद हो रही है।
नए सिरे से मुहिम की जरूरत
झाबुआ जिले में स्कूल-कॉलेजों के बाहर और छुट्टी के समय मनचलों की मंडलियां अक्सर देखी जाती हैं, जो छात्राओं पर फब्तियां कसकर माहौल बिगाड़ने की कोशिश करती हैं।
स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन से मांग की है कि पुलिस ऐसे असामाजिक तत्वों पर नकेल कसने के लिए विशेष अभियान चलाए, ताकि बेटियां निडर होकर शिक्षा ग्रहण कर सकें और समाज में सुरक्षित वातावरण कायम हो।
समाज के लिए संदेश
मेघनगर की छात्रा का साहस इस बात का प्रतीक है कि एक जागरूक और निर्भीक नागरिक किस तरह से अपराध के खिलाफ मोर्चा खोल सकता है। यह घटना सभी अभिभावकों और छात्राओं के लिए संदेश है कि अन्याय या उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठाना ही पहला कदम है, और कानून हमेशा आपके साथ खड़ा है।


