सतना/अंकित शर्मा/खबर डिजिटल/ सतना जिला कलेक्ट्रेट के बाहर भारी संख्या मे ट्रेनी डाक्टरों ने प्रदर्शन किया। मेडिकल कालेज में अस्पताल ,जिला अस्पताल मे डोमेनस्ट्रेशन हाल न होने जैसी प्रमुख चार सूत्रीय मांगो को लेकर अपर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने ट्रेनिंग में लापरवाही बरतने के कारण जमकर नारेबाजी की।
गंभीर बुनियादी कमियों का विरोध
सतना के शासकीय मेडिकल कॉलेज के ट्रेनी डॉक्टरों ने सोमवार को जिला कलेक्ट्रेट के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन उनकी क्लीनिकल ट्रेनिंग और शिक्षा की गुणवत्ता को प्रभावित करने वाली गंभीर बुनियादी कमियों के विरोध में किया गया। छात्रों ने जिला अपनी ट्रेनिंग छोड़ पहले जिला अस्पताल के बाहर प्रदर्शन किया पगोर अपनी चार-सूत्रीय मांगों को लेकर जिला कलेक्ट्रेट के बाहर नारे लगाकर अपर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा।
ट्रेनी डॉक्टरों ने दी जानकारी
ट्रेनी डॉक्टरों का कहना है कि उनकी पढ़ाई और प्रशिक्षण दांव पर है, क्योंकि मेडिकल कॉलेज, जिसकी स्थापना तीन साल पहले हुई थी, अभी तक नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) के मानकों के अनुरूप अपनी आवश्यक सुविधाओं को पूरा नहीं कर पाया है। असुरक्षित आवागमन और सुविधाओं के आभाव मे प्रशिक्षण का संकट कॉलेज का अपना अस्पताल न होना प्रदर्शन का मुख्य मुद्दा रहा। छात्रों के अनुसार, NMC के मानकों के तहत हर मेडिकल कॉलेज के पास अपना अस्पताल होना चाहिए, लेकिन सतना में अस्पताल के अभाव के कारण उन्हें क्लीनिकल पोस्टिंग के लिए 8 किलोमीटर दूर स्थित जिला अस्पताल जाना पड़ता है। इस 8 किलोमीटर की दूरी को तय करने के लिए छात्रों को सबसे बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ता है। वह है सरकारी परिवहन सुविधा (बस) का न होना। छात्रों ने बताया कि उन्हें हर दिन अपने खर्च पर निजी ऑटो या निजी वाहनों से जाना पड़ता है। एक छात्रा ने बताया कि ऑटो वाले मनमाने ढंग से किराया वसूलते हैं और हॉस्टल के सामने हंगामा करते हैं, गंभीर बात यह है कि बस की कमी के चलते यात्रा के दौरान ट्रेनी डाक्टर दुर्घटना के शिकार भी हो चुके हैं जिससे उनकी सुरक्षा खतरे में है।
परिवहन के साथ अन्य असुविधाएं
परिवहन की समस्या के अलावा, ट्रेनी डॉक्टरों को जिला अस्पताल में सीखने के माहौल में भी गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। उनके पास शिक्षण और क्लीनिकल डेमोंस्ट्रेशन के लिए कोई पर्याप्त लेक्चर या डेमोंस्ट्रेशन हॉल नहीं है। मजबूरी में, छात्रों को छोटे ओपीडी कमरों में या फिर गलियारों में खड़े होकर पढ़ाई करनी पड़ती है, जिससे अत्यधिक भीड़, दम घुटने जैसी स्थिति पैदा होती है और कई बार तो छात्र बेहोश भी हो जाते हैं। एक प्रदर्शनकारी छात्रा ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि, “हमारा भविष्य दांव पर है। हम पढ़ने आए हैं, सर्वाइव करने नहीं।”इसके साथ ही, डॉक्टरों ने जिला अस्पताल में वॉशरूम (शौचालय) जैसी अत्यंत बुनियादी सुविधाओं की अनुपलब्धता पर भी चिंता जताई, विशेषकर महिला छात्रों के लिए यह एक बड़ी दिक्कत है। छात्रों का साफ कहना है कि सुविधाओं के अभाव में उनकी शिक्षा गुणवत्ता हीन हैं।
अपर कलेक्टर ने दिया आश्वासन
ट्रेनी डॉक्टरों से ज्ञापन लेने के बाद, कलेक्टर के प्रतिनिधि के रूप मे अपर कलेक्टर ने उनकी मांगों का ज्ञापन लेकर समाधान करने का आश्वासन दिया हैं उन्होंने स्वीकार किया कि बस की उपलब्धता में टेंडर प्रक्रिया के कारण विलंब हो रहा है, और इस समस्या के समाधान के लिए जल्द ही भोपाल में उच्च स्तर पर बातचीत की जाएगी। अस्पताल में शैक्षणिक और अन्य स्थानीय सुविधाओं की कमी के संबंध में, उन्होंने आश्वासन दिया कि जिला प्रशासन जल्द ही जिला अस्पताल का दौरा करेगा और छात्रों की सभी जायज समस्याओं का समाधान सुनिश्चित किया जाएगा।
बदहाल व्यवस्था पर राजनेता मौन
राज नेताओ की सियासी होड़ में तीन वर्ष पूर्व हाथी दांत के समान पंडित अटल बिहारी बाजपेई मेडिकल कॉलेज सतना की ईमारत तो बुलंद कर दी, लेकिन प्रदर्शनकारी ट्रेनी डाक्टरो की मांग ने स्वास्थ्य शिक्षा की बदहाल व्यवस्था की पोल खोल दी हैं। मांग के मुताबिक आज तक मेडिकल कॉलेज एनएमसी के मापदंडों पर खरा नहीं उतर पाया, ऐसे मे उनकी बेहतर चिकित्सा शिक्षा की कल्पना करना बेमानी है, भविष्य में वे अच्छे डॉक्टर कैसे बनेंगे और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी कैसे निभाएंगे ये एक बड़ा सवाल हैं।
