डिंडौरी/शैलेश नामदेव/खबर डिजिटल/ सरकार भले ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा व्यवस्था के दावे करती हो, लेकिन डिंडौरी जिले की जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोलती नजर आती है। जिले के कई शासकीय स्कूल आज भी बुनियादी सुविधाओं से कोसों दूर हैं—कहीं भवन नहीं, तो कहीं शिक्षक नहीं। कई जगह शिक्षक हैं, पर उनके पढ़ाने के लिए भवन ही उपलब्ध नहीं है।
जर्जर भवन जमींदोज, वैकल्पिक व्यवस्था शून्य
प्रशासन के आदेश पर कई पुराने और जर्जर स्कूल भवनों को ध्वस्त किया जा चुका है। कुछ भवनों में संचालन पर रोक भी लगा है, लेकिन विडंबना यह है कि इन स्कूलों के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था आज तक नहीं बनाई गई। मजबूरी में शिक्षक और अभिभावक मिलकर किसी न किसी तरह पढ़ाई जारी रखने की जद्दोजहद कर रहे हैं—कहीं झोपड़ी डालकर स्कूल चल रहा है, तो कहीं एक किराये का कमरा ही कक्षा कक्ष बन चुका है।
किराये की शाला… पर प्रशासन बेखबर
कई जगह किराये के भवनों में संचालित स्कूलों का किराया तक विभाग द्वारा नहीं चुकाया जाता। शिक्षक व अभिभावक महीनों तक आवंटन की प्रतीक्षा करते रहते हैं। उधर जनप्रतिनिधि भी शिक्षा की दुर्दशा पर चुप्पी साधे हुए हैं। परिणामस्वरूप बच्चों की पढ़ाई न रुके, इसके लिए अभिभावक ही आगे आकर चंदा इकट्ठा कर किराये के मकानों में स्कूल चलाने की जिम्मेदारी उठा रहे हैं।
विधायक के गृह ग्राम का मामला
सबसे चौंकाने वाला मामला कांग्रेस विधायक व पूर्व मंत्री ओमकार मरकाम के गृह ग्राम बरनई पंचायत के पोषक गांव भीमकुंडी से सामने आया है। यहाँ की प्राथमिक शाला का भवन दो वर्ष पूर्व जर्जर होने पर डिस्मेंटल कर दिया गया था। तब से स्कूल एक किराये के मकान में संचालित हो रहा है। सबसे बड़ी बात, किराया सरकार नहीं, बल्कि गरीब अभिभावक अपने चंदे से दे रहे हैं। हर माह प्रति अभिभावक 50–50 रुपये इकट्ठा करके लगभग 1 हजार रुपये किराया चुकाया जाता है।
अभिभावकों की मजबूरी
अभिभावकों का कहना है कि यदि वे किराया न दें तो बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह ठप हो जाएगी। “बच्चों की पढ़ाई बंद न हो इसलिए हम सभी अभिभावक पचास-पचास रुपये चंदा कर स्कूल किराये में दे रहे हैं।” — अशोक मरावी, अभिभावक
विधायक कटघरे में, भाजपा ने इस्तीफा मांगा
इस मामले पर राजनीति भी गर्मा गई है। भाजपा कार्यकर्ताओं ने सीधे विधायक को ही कटघरे में खड़ा किया है।
“विधायक के ही गांव में स्कूल की यह दुर्दशा हो तो उन्हें पद पर बने रहने का कोई हक नहीं। इस्तीफा देना चाहिए।” — वीरेन्द्र बिहारी शुक्ला, भाजपा कार्यकर्ता
वहीं विधायक ओमकार मरकाम ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा
“जिले में 500 से अधिक भवन-विहीन स्कूल हैं, पर सरकार मानने को तैयार नहीं। विधानसभा में मंत्री तक ने कहा कि डिंडौरी में एक भी भवन जर्जर नहीं है।” — ओमकार मरकाम, विधायक
विभाग ने कहा – जल्द बनेगी वैकल्पिक व्यवस्था
जनजातीय कार्य विभाग ने अब आश्वासन दिया है कि स्कूल को जल्द ही वैकल्पिक सरकारी भवन उपलब्ध कराया जाएगा।
“सरकारी भवन होने पर वहीं शाला संचालित की जाएगी। अन्यथा आवंटन मिलते ही किराया विभाग द्वारा दिया जाएगा।” — राजेन्द्र जाटव, सहायक आयुक्त


