यहाँ रिपोर्ट पढ़ें –here.
ACCA, IFAC, CA ANZ और OECD द्वारा संयुक्त रूप से जारी नवीनतम सर्वेक्षण के अनुसार, कराधान (Taxation) के प्रति सार्वजनिक विश्वास के मामले में एशिया और विशेष रूप से भारत ने वैश्विक स्तर पर अपनी मजबूत स्थिति दर्ज की है। 29 देशों के 12,000 से अधिक लोगों पर किए गए इस सर्वेक्षण के निष्कर्ष बताते हैं कि डिजिटल पहुंच और पारदर्शिता के कारण एशियाई देशों में नागरिकों और राज्य के बीच ‘वित्तीय अनुबंध’ (Fiscal Contract) यूरोप और लैटिन अमेरिका की तुलना में कहीं अधिक सुदृढ़ है। जकार्ता में आयोजित ‘IFAC कनेक्ट ASIAPAC 2025’ के दौरान इन परिणामों को साझा किया गया, जिसमें कर प्रणाली की निष्पक्षता और सार्वजनिक मूल्य पर जोर दिया गया।
भारत के संदर्भ में रिपोर्ट में प्रभावशाली आंकड़े सामने आए हैं, जो देश की मजबूत कर नैतिकता को दर्शाते हैं। लगभग 45% भारतीय उत्तरदाताओं का मानना है कि कर राजस्व का उपयोग सार्वजनिक भलाई के लिए किया जाता है, जबकि 41% इसे केवल एक लागत के बजाय समुदाय के लिए योगदान के रूप में देखते हैं। नैतिकता के प्रति प्रतिबद्धता का स्तर इतना उच्च है कि 68% भारतीयों ने अवसर मिलने पर भी टैक्स चोरी को कभी जायज नहीं ठहराने की बात कही। इसके अतिरिक्त, 80% भारतीय उत्तरदाता सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) और हरित ऊर्जा परियोजनाओं के समर्थन के लिए अतिरिक्त कर देने को भी तैयार हैं, जो वित्तीय नीति और सामाजिक लक्ष्यों के बीच बढ़ते तालमेल को प्रमाणित करता है।
सर्वेक्षण में यह भी स्पष्ट हुआ कि सभी क्षेत्रों में पेशेवर लेखाकार (Accountants) कर संबंधी जानकारी के लिए सबसे विश्वसनीय स्रोत बने हुए हैं, जबकि राजनेताओं और सोशल मीडिया पर भरोसा सबसे कम है। ACCA की मुख्य कार्यकारी हेलेन ब्रांड ने कहा कि एशिया की कर प्रणालियाँ दुनिया के लिए सबक हैं, जहाँ पारदर्शिता और दृश्यमान लाभ ही विश्वास के मूल स्तंभ हैं। OECD की मनाल कोरविन ने बताया कि यह एशिया में कर नैतिकता पर उनके नए प्रोजेक्ट का पहला चरण है और अगले वर्ष क्षेत्र की सरकारों के साथ इन सर्वोत्तम प्रथाओं पर चर्चा की जाएगी। रिपोर्ट के आधिकारिक निष्कर्षों पर विस्तृत चर्चा के लिए 11 फरवरी 2026 को एक वैश्विक वेबिनार का आयोजन भी किया जाएगा।


