स्वर्णकार समाज की एक ही पुकार: न्याय, सुरक्षा और व्यापार का अधिकार”🚨
कटनी – कॉर्पोरेट की मनमानी और सरकारी अनदेखी से भुखमरी की कगार पर देश का स्वर्णकार:
देश की अर्थव्यवस्था और संस्कृति की रीढ़ माने जाने वाले स्वर्णकार समाज और छोटे कारीगर आज अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं। कटनी सराफा एसोसिएशन के कार्यवाहक अध्यक्ष संजय सोनी ने भारत सरकार का ध्यान इस गंभीर मुद्दे की ओर आकर्षित किया।
गुरुवार को जारी एक बयान में संजय सोनी ने कहा कि सोना-चाँदी के अनियंत्रित दाम और कॉर्पोरेट ज्वेलर्स के एकाधिकार ने छोटे स्वर्णकारों की कमर तोड़ दी है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि छोटे कारीगरों को बचाने के लिए तुरंत ठोस कदम उठाए जाएं।
मुख्य चुनौतियां और संकट:
श्री सोनी ने बताया कि वर्तमान में स्वर्णकार समाज तीन तरफा मार झेल रहा है:
अनियंत्रित दाम: सोने-चाँदी के भावों में अस्थिरता के कारण ग्राहकों की आवक कम हो गई है, जिसका सीधा असर छोटे दुकानदारों पर पड़ा है।
दोषपूर्ण नीतियां: सरकारी सिस्टम और नीतियों में जटिलता के कारण पुश्तैनी कारीगर परेशान हैं।
कॉर्पोरेट दबाव: बड़े कॉर्पोरेट घरानों के भ्रामक विज्ञापनों और अनुचित दबाव के कारण हजारों छोटे स्वर्णकारों को अपनी दुकानें बंद करनी पड़ रही हैं।
”भूख से तड़पते बच्चों का क्या कसूर?”
“जो समाज सदियों से भारत को ‘सोने की चिड़िया’ बनाने में योगदान देता रहा, आज वही समाज भूख और बेरोजगारी के कगार पर खड़ा है। हमारे बच्चों का क्या कसूर है? हम सरकार से भीख नहीं, अपना अधिकार और न्याय मांगते हैं।”
सरकार से प्रमुख मांगें:
स्वर्णकार समाज ने भारत सरकार के सामने निम्नलिखित मांगें रखी हैं:
स्वर्णकारों के लिए न्यायसंगत और व्यावहारिक नीतियां बनाई जाएं।
छोटे व्यवसायों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
पारंपरिक कारीगरों को सरकारी संरक्षण और आर्थिक सहायता मिले।
अंत में, यदि सरकार ने जल्द ही इस ओर ध्यान नहीं दिया, तो यह आंदोलन और उग्र होगा। उन्होंने समस्त स्वर्णकार समाज से एकजुट होने का आह्वान किया है।
स्वर्णकार समाज की एक ही पुकार: न्याय, सुरक्षा और व्यापार का अधिकार”🚨
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