अनूपपुर/मनोज तिवारी/खबर डिजिटल/ जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में शासन द्वारा ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से नल-जल योजना के तहत पानी की टंकियों का निर्माण कराया गया था। इन टंकियों को बने 5 से 10 वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन लंबे समय से इनकी नियमित सफाई नहीं कराई जा रही है। इसका सीधा असर ग्रामीणों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है।
टंकी का दूषित पानी पहुंच रहा घर-घर
ग्रामीण क्षेत्रों में बनी पानी की टंकियों में गंदगी, काई और अन्य अशुद्धियां जमा हो चुकी हैं। इन्हीं टंकियों से बिना शुद्धिकरण के पानी सप्लाई किया जा रहा है, जिससे दूषित पानी लोगों के घरों तक पहुंच रहा है। ग्रामीण मजबूरी में इसी पानी का उपयोग पीने और खाना बनाने में कर रहे हैं।
बीमारियों का बढ़ता खतरा
दूषित पानी पीने से ग्रामीणों में पेट संबंधी रोग, त्वचा रोग और अन्य गंभीर बीमारियां लगातार बढ़ रही हैं। इसके बावजूद ग्राम पंचायत स्तर पर जिम्मेदार अधिकारी इस गंभीर समस्या पर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
फिल्टर मशीनें पड़ी हैं बेकार
विशेष सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार ग्रामीण टंकियों में पानी शुद्ध करने के लिए लगभग 80 हजार रुपये की लागत से वाटर फिल्टर मशीनें लगाई गई थीं, लेकिन रखरखाव के अभाव में ये मशीनें बेकार पड़ी हैं और उपयोग में नहीं लाई जा रही हैं।
प्रशासन से कार्रवाई की मांग
यदि अनूपपुर जिले के जिला पंचायत सीईओ एवं कलेक्टर हर्षल पंचोली इस गंभीर मुद्दे को संज्ञान में लेते हैं, तो ग्रामीणों को शुद्ध और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराया जा सकता है।


