भारत के दूसरे सबसे बड़े निजी ऋणदाता, ICICI बैंक के निदेशक मंडल ने शनिवार को एक महत्वपूर्ण फैसले में संदीप बख्शी को फिर से बैंक का प्रबंध निदेशक (MD) और सीईओ नियुक्त करने की मंजूरी दे दी है। उनका नया कार्यकाल 4 अक्टूबर, 2026 से 3 अक्टूबर, 2028 तक होगा। 1986 से ICICI समूह का हिस्सा रहे श्री बख्शी को 2018 में पदभार संभालने के बाद से बैंक की संस्कृति को बदलने, जोखिम नियंत्रण को कड़ा करने और परिसंपत्ति गुणवत्ता (Asset Quality) में क्रांतिकारी सुधार करने का श्रेय दिया जाता है।
वित्तीय परिणाम: प्रावधानों के कारण मुनाफे में मामूली गिरावट बैंक ने दिसंबर 2025 को समाप्त हुई तीसरी तिमाही (Q3-FY26) के परिणाम भी घोषित किए हैं। बैंक का शुद्ध लाभ सालाना आधार पर 4% घटकर ₹11,318 करोड़ रहा (पिछले वर्ष इसी तिमाही में यह ₹11,792 करोड़ था)। मुनाफे में इस कमी का मुख्य कारण प्रावधानों (Provisions) में हुई वृद्धि है, जो ₹1,227 करोड़ से बढ़कर ₹2,556 करोड़ हो गए। इसमें RBI के निर्देशानुसार कृषि प्राथमिकता क्षेत्र ऋण (Agri Priority Sector Lending) के लिए किया गया ₹1,283 करोड़ का अतिरिक्त प्रावधान शामिल है। बैंक का कहना है कि यदि यह विशेष प्रावधान नहीं होता, तो शुद्ध लाभ में 4.1% की सकारात्मक वृद्धि होती।
मुख्य आय और परिसंपत्ति गुणवत्ता में मजबूती: एकमुश्त प्रावधानों के बावजूद, बैंक की कोर आय के संकेतक मजबूत बने हुए हैं:
- शुद्ध ब्याज आय (NII): सालाना आधार पर 7.7% की बढ़त के साथ ₹21,932 करोड़ रही।
- शुद्ध ब्याज मार्जिन (NIM): 4.30% के स्वस्थ स्तर पर बना हुआ है।
- एनपीए (NPA) में सुधार: सकल एनपीए (Gross NPA) घटकर 1.86% और शुद्ध एनपीए सुधरकर 0.39% के स्तर पर आ गया है।
- ऋण पोर्टफोलियो: घरेलू ऋण पोर्टफोलियो में 14.8% की स्वस्थ वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि संदीप बख्शी को मिला विस्तार बैंक में निरंतरता और स्थिरता सुनिश्चित करेगा, जिससे निवेशकों का भरोसा और मजबूत होगा।


