मुंबई : एसोसिएशन ऑफ इन्वेस्टमेंट बैंकर्स ऑफ इंडिया (AIBI) ने मुंबई के जियो वर्ल्ड कन्वेंशन सेंटर में अपना 14वां वार्षिक सम्मेलन आयोजित किया। “भारत में आईपीओ: वैश्विक पूंजी का द्वार, सतत विकास, विकसित भारत” विषय पर आधारित इस सम्मेलन में सेबी (SEBI) के अध्यक्ष श्री तुहिन कांत पांडे ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। सम्मेलन में एनएसई और बीएसई के प्रमुखों सहित 1500 से अधिक विशेषज्ञों ने भाग लिया, जहाँ भारत के प्राथमिक बाज़ार को वैश्विक पूंजी प्रवाह का केंद्र बनाने पर चर्चा हुई।
बाजार पारदर्शिता के लिए महत्वपूर्ण पहलों का अनावरण पूंजी बाजार में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाने के उद्देश्य से सेबी अध्यक्ष ने कई महत्वपूर्ण डिजिटल और प्रिंट संसाधनों का अनावरण किया। इनमें ‘मर्चेंट बैंकर अनुपालन रेफरेंसर’ और ‘जारीकर्ताओं के लिए निर्देशिका’ प्रमुख हैं, जो विशेष रूप से एसएमई (SME) सूचीबद्धता की नियामक प्रक्रियाओं को सरल बनाएंगे। इसके अलावा, एआईबीआई ने इंटरनेशनल कैपिटल मार्केट एसोसिएशन (ICMA), लंदन के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए, जो वैश्विक सहयोग और क्षमता निर्माण की दिशा में एक बड़ा कदम है।
पूंजी निर्माण और निवेशक जागरूकता पर जोर सम्मेलन के दौरान ‘कैपिटल फॉर्मेशन’ पर एक श्वेत पत्र (White Paper) भी जारी किया गया, जो भारत की $10 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बनने की यात्रा और लिक्विडिटी रुझानों का विश्लेषण करता है। निवेशकों के लिए ‘प्रॉस्पेक्टस नेविगेशन गाइड’ और ‘निवेशक जागरूकता वीडियो’ जैसे टूल लॉन्च किए गए ताकि आम निवेशक अपने अधिकारों और आईपीओ प्रक्रिया को बेहतर ढंग से समझ सकें।
एआईबीआई के अध्यक्ष, श्री महावीर लूनावत ने कहा कि भारत आज उस मुकाम पर है जहाँ निवेशकों की बढ़ती संख्या पूंजी बाजार को नई ताकत दे रही है। ये पहल एक सुदृढ़ निवेश संस्कृति बनाने और बेहतर पूंजी निर्माण के लिए ज्ञान तक पहुंच प्रदान करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होंगी। सम्मेलन ने स्पष्ट किया कि भारत का लक्ष्य एक ऐसा पारदर्शी और विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बाजार ढांचा तैयार करना है जो विकसित भारत के दृष्टिकोण के अनुरूप हो।


