पुणे: भविष्य की तकनीकी चुनौतियों का सामना करने के लिए अब केवल किताबी ज्ञान पर्याप्त नहीं है, बल्कि दुनिया को ऐसे ‘AVATAR’ टैलेंट की आवश्यकता है जो सीमाओं से परे सोचने में सक्षम हों। यह विचार अमेरिका स्थित Reignite Future के सीईओ डॉ. सत्यम प्रियदर्शी ने पुणे के MIT वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी (MIT-WPU) में आयोजित ‘सेमीकंडक्टर एवं रिन्यूएबल एनर्जी विज़न मीट’ में व्यक्त किए। उन्होंने भविष्य के पेशेवरों के लिए ‘AVATAR’ अवधारणा को परिभाषित करते हुए बताया कि उन्हें Always (हमेशा तैयार), Versatile (बहुआयामी), Adaptable (अनुकूलनशील), Transformative (परिवर्तनकारी), Agile (फुर्तीले) और Resilient (लचीले) होना अनिवार्य है।
कार्यक्रम के दौरान भारत के सेमीकंडक्टर मिशन पर चर्चा करते हुए डॉ. अरविंद शालिग्राम ने एक महत्वपूर्ण आंकड़ा साझा किया। उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र में आने वाले समय में लगभग 15 लाख कुशल पेशेवरों और कई मिलियन अर्ध-कुशल कर्मियों की आवश्यकता होगी। डिज़ाइन, फैब्रिकेशन, असेंबली, टेस्टिंग और पैकेजिंग जैसे क्षेत्रों में यह मांग अगले कई दशकों तक बनी रहेगी, जिससे यह क्षेत्र भविष्य का सबसे बड़ा रोजगार सृजनकर्ता बनकर उभरेगा। मार्वेल टेक्नोलॉजी के वरिष्ठ विशेषज्ञ श्री अपूर्वा कापसे ने छात्रों को डिजिटल इलेक्ट्रॉनिक्स और सर्किट डिज़ाइन की मजबूत बुनियाद पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी, ताकि वे VLSI (Very Large Scale Integration) के क्षेत्र में अपना सफल करियर बना सकें।
शिक्षा और उद्योग के बीच की खाई को पाटने पर जोर देते हुए MIT-WPU के मुख्य शैक्षणिक अधिकारी डॉ. प्रसाद खांडेकर ने कहा कि संस्थान अब टूल्स, पाठ्यक्रम और उद्योग साझेदारियों में निवेश कर रहा है ताकि कैंपस को सेमीकंडक्टर अनुसंधान का ‘लॉन्चपैड’ बनाया जा सके। वहीं, डॉ. सतीशचंद्र ओगले ने रिन्यूएबल एनर्जी के क्षेत्र में छात्रों से सतही ज्ञान के बजाय ‘गहन विशेषज्ञता’ विकसित करने का आह्वान किया। विशेषज्ञों का सामूहिक मानना था कि विश्वविद्यालयों को केवल डिग्री देने तक सीमित न रहकर पीएचडी कार्यक्रमों, स्टार्टअप्स और प्रायोजित अनुसंधान (Sponsored Research) के माध्यम से नवाचार का केंद्र बनना चाहिए।
अंत में, विद्युत एवं इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग विभाग की प्रोग्राम डायरेक्टर डॉ. पारुल जाधव ने भविष्य के लिए तैयार प्रतिभा विकसित करने के प्रति विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता दोहराई। यह विज़न मीट स्पष्ट करती है कि भारत के तकनीकी भविष्य का आधार वह युवा टैलेंट होगा जो उन्नत तकनीकों के साथ-साथ नवाचार और जिम्मेदारी का संतुलन बनाए रखेगा।


