नई दिल्ली: भारत के प्रमुख प्राकृतिक संसाधन समूह, वेदांता लिमिटेड ने वित्त वर्ष 2026 में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए देश के विभिन्न राज्यों में 5 लाख से अधिक बालिकाओं के जीवन को सकारात्मक रूप से प्रभावित किया है। कंपनी ने शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल विकास के माध्यम से लड़कियों को सशक्त बनाने की अपनी दीर्घकालिक प्रतिबद्धता की पुष्टि की है। यह पहल संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (SDG)—विशेषकर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा (SDG 4), लैंगिक समानता (SDG 5), और बेहतर स्वास्थ्य (SDG 3)—के अनुरूप एक ‘जीवन-चक्र आधारित’ दृष्टिकोण पर टिकी है।
बचपन से किशोरावस्था तक का साथ वेदांता की इस यात्रा की शुरुआत ‘नंद घर’ कार्यक्रम से होती है, जो 17 राज्यों में 11,000 से अधिक आधुनिक आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से 2 लाख से अधिक नन्ही बालिकाओं को पोषण और प्रारंभिक शिक्षा प्रदान कर रहा है। जैसे-जैसे ये बालिकाएं बड़ी होती हैं, ‘प्रोजेक्ट विद्याग्रह’ (ओडिशा) और ‘शिक्षा संबल’ (राजस्थान) जैसे कार्यक्रम डिजिटल-फर्स्ट लर्निंग और एसटीईएम (STEM) शिक्षा के जरिए उनके स्कूली प्रदर्शन को बेहतर बनाने में मदद करते हैं। उदाहरण के लिए, वेदांता सेसा गोवा की ‘उत्कर्ष छात्रवृत्ति’ के लाभार्थियों में अब 50 प्रतिशत संख्या बालिकाओं की है।
स्वास्थ्य, स्वच्छता और खेल में नेतृत्व वेदांता ने किशोरावस्था में स्वास्थ्य और गरिमा के महत्व को पहचानते हुए ओडिशा में ‘प्रोजेक्ट लाडली’ जैसे कार्यक्रम शुरू किए हैं। ये पहल माहवारी स्वच्छता, एनीमिया जांच और पोषण सहायता पर केंद्रित हैं, जिससे किशोरियों में आत्मविश्वास बढ़ा है। शिक्षा के साथ-साथ खेलों में भी वेदांता ने नई राह दिखाई है। हिंदुस्तान जिंक की भारत की पहली आवासीय बालिका फुटबॉल अकादमी और गोवा की सेसा फुटबॉल अकादमी की महिला टीम ने ‘इंडियन विमेन्स लीग 2026’ के लिए क्वालीफाई कर इतिहास रचा है। अकादमी की खिलाड़ी आरौशी गोवेकर, जिन्होंने भारतीय राष्ट्रीय टीम में जगह बनाई, इस सफलता का जीता-जागता उदाहरण हैं।
करियर और उच्च शिक्षा के अवसर उच्च शिक्षा के स्तर पर, ‘ऊंची उड़ान’ (हिंदुस्तान जिंक) और ‘बाल्को कनेक्ट’ (छत्तीसगढ़) जैसे कार्यक्रम ग्रामीण क्षेत्रों की बालिकाओं को आईआईटी (IIT) और सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेजों की प्रवेश परीक्षाओं के लिए विशेष कोचिंग प्रदान कर रहे हैं। राष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर वेदांता ने अपनी सभी परिचालन इकाइयों में महिला उपलब्धियों का सम्मान किया, जो इस विश्वास को पुख्ता करता है कि जब एक लड़की शिक्षित और सशक्त होती है, तो पूरा समाज प्रगति करता है।


