उज्जैन/ कमलेश जाटवा/ खबर डिजिटल/ विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका मंगलवार को खारिज कर दी गई। सुप्रीम कोर्ट ने इंदौर हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए कहा कि गर्भगृह में किसे प्रवेश मिलेगा, यह नियम मंदिर समिति और जिला प्रशासन तय करेंगे।
हाईकोर्ट का आदेश बरकरार
याचिकाकर्ता ने गर्भगृह में आम श्रद्धालुओं के प्रवेश की मांग की थी। इसी दलील पर अगस्त 2025 में इंदौर हाईकोर्ट ने निर्णय दिया था कि गर्भगृह में कौन जाएगा और कौन नहीं, यह निर्णय मंदिर समिति व कलेक्टर तय करेंगे।
आम श्रद्धालुओं पर प्रतिबंध
महाकाल लोक के लोकार्पण के बाद श्रद्धालुओं की संख्या प्रतिदिन 3-4 गुना बढ़ गई। इसे देखते हुए आम श्रद्धालुओं को गर्भगृह में प्रवेश से पूरी तरह रोक दिया गया। वहीं विवाद तब शुरू हुआ जब कुछ वीआईपी श्रद्धालुओं को गर्भगृह में प्रवेश दिया जाने लगा, जबकि आम श्रद्धालु बाहर से ही दर्शन करते रहे।
दर्शन व्यवस्था
महाकाल मंदिर में अलग-अलग स्तर पर दर्शन की व्यवस्था है। वीवीआईपी गर्भगृह में प्रवेश करते हैं, कुछ श्रद्धालुओं को चौखट तक प्रवेश मिलता है, कुछ नंदी हाल में बैठकर दर्शन करते हैं, जबकि अधिकांश श्रद्धालुओं को बैरिकेड के पीछे से ही दर्शन कराए जाते हैं।
सांसद ने उठाया मुद्दा
1 जनवरी को उज्जैन सांसद अनिल फिरोजिया मंदिर पहुंचे और आम श्रद्धालुओं की पीड़ा देखकर खुद लाइन में लगकर दर्शन किए। उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की कि आम श्रद्धालुओं को भी 2 घंटे के लिए गर्भगृह में प्रवेश दिया जाए।

सुप्रीम कोर्ट के बाद फिर उठी मांग
आज सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद यह मामला फिर गरमाया है और जनप्रतिनिधि व आम लोगों की आवाज को ताकत मिलेगी। सांसद अनिल फिरोजिया ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि कलेक्टर ही यह तय करते हैं कि कौन गर्भगृह में जाएगा। उन्होंने कहा राजा हो या रंक, भगवान के लिए सब बराबर हैं, इसलिए वीआईपी को अनुमति है तो आम श्रद्धालुओं को भी मिलनी चाहिए।
