उमरिया/ केजी पांडेय/ खबर डिजिटल/ रिश्तों ने रिश्तों को लूटा – यह सिर्फ एक पंक्ति नहीं, बल्कि उमरिया जिले के मानपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम महरौई से सामने आए एक गंभीर मामले की सच्चाई है। पैतृक भूमि विवाद में पीड़ित को न सिर्फ अपनों की साजिश का सामना करना पड़ा, बल्कि न्यायालय के आदेश के बावजूद प्रशासनिक उदासीनता भी झेलनी पड़ रही है।
पैतृक जमीन पर अवैध कब्जे का आरोप
पीड़ित का आरोप है कि उसके चाचा ने बिना पारिवारिक सहमति और वैध बंटवारे के पैतृक भूमि पर अवैध रूप से पेट्रोल पंप स्थापित कर लिया। यह पूरा मामला नियमों को दरकिनार कर अंजाम दिया गया, जिसमें राजस्व विभाग की भूमिका भी संदेह के घेरे में है।
राजस्व अमले पर मिलीभगत के आरोप
पीड़ित के अनुसार पटवारी और तहसीलदार की कथित मिलीभगत से झूठी रिपोर्ट तैयार कर एसडीएम कार्यालय में पेश की गई। हालांकि तत्कालीन तहसीलदार ने दस्तावेजों की जांच के बाद पीड़ित के पक्ष में निर्णय दिया।
एसडीएम से हाईकोर्ट तक न्याय
बाद में मामला एसडीएम के समक्ष पहुंचा, जहां तथ्यों के आधार पर पूरी कार्रवाई निरस्त कर दी गई। इसके पश्चात उच्च न्यायालय ने स्पष्ट रूप से अवैध कब्जे से बेदखली के आदेश जारी किए।
प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
पीड़ित द्वारा कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को लिखित शिकायतें देने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। न कब्जा हटाया गया, न जिम्मेदारों पर कार्रवाई। यह मामला अब प्रशासनिक जवाबदेही और न्याय व्यवस्था की गंभीर परीक्षा बन चुका है।


