आगामी केंद्रीय बजट से पहले माइक्रोफाइनेंस इंडस्ट्री नेटवर्क (MFIN) ने सरकार से ग्रामीण और अल्प आय वर्ग के वित्तीय समावेशन को मजबूत करने के लिए ठोस नीतिगत हस्तक्षेप की अपील की है। MFIN के सीईओ और निदेशक डॉ. आलोक मिश्रा ने रेखांकित किया कि देश के लगभग 30 करोड़ लोगों की आजीविका से जुड़े इस क्षेत्र को सुरक्षित ऋण वितरण के लिए एक मजबूत और आधुनिक केवाईसी (KYC) ढांचे की आवश्यकता है।
KYC और फंडिंग की चुनौतियों का समाधान डॉ. मिश्रा ने आधार के सीमित उपयोग से जुड़ी कानूनी बाधाओं को दूर करने के लिए आधार के अंतिम चार अंकों के सुरक्षित भंडारण या ‘टोकनाइज़ेशन’ (Tokenization) जैसे डिजिटल समाधानों का सुझाव दिया है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने एनबीएफसी-एमएफआई (NBFC-MFI) के लिए ‘सतत फंडिंग व्यवस्था’ की मांग की। उन्होंने चिंता जताई कि बैंकों पर अत्यधिक निर्भरता और पिछले एक साल में फंडिंग में आई कमी के कारण लगभग 50 लाख ग्राहक औपचारिक वित्तीय प्रणाली से बाहर हो गए हैं। इस संकट को दूर करने के लिए उन्होंने प्रस्तावित ‘क्रेडिट गारंटी योजना’ को जल्द लागू करने की वकालत की।
क्रेडिट अनुशासन में ऐतिहासिक सुधार सेक्टर के स्वास्थ्य पर सकारात्मक डेटा साझा करते हुए डॉ. मिश्रा ने बताया कि सूक्ष्म ऋणों के भुगतान में अनुशासन काफी बेहतर हुआ है। आरबीआई द्वारा विनियमित संस्थाओं के लिए ‘पोर्टफोलियो एट रिस्क’ (1–90 दिन), जो दिसंबर 2024 में 5.3% के उच्च स्तर पर था, दिसंबर 2025 तक नाटकीय रूप से घटकर 2.4% रह गया है। यह सुधार ग्राहकों की बढ़ती ऋण क्षमता और संस्थाओं के बेहतर जोखिम प्रबंधन को दर्शाता है।
