हैदराबाद : अपनी परिचालन दक्षता और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, एयर इंडिया ने आज बोइंग के साथ एक बहु-वर्षीय ‘कंपोनेंट सर्विसेज प्रोग्राम’ (CSP) समझौते की घोषणा की है। हैदराबाद में आयोजित ‘विंग्स इंडिया 2026’ के दौरान हस्ताक्षरित यह समझौता एयर इंडिया के संपूर्ण बोइंग 787 ड्रीमलाइनर बेड़े (मौजूदा और भविष्य के ऑर्डर्स) के लिए एंड-टू-एंड पुर्जा प्रबंधन सुनिश्चित करेगा।
परिचालन दक्षता के लिए एकीकृत समाधान जैसे-जैसे एयर इंडिया अपने अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का विस्तार कर रही है, विमानों की समयबद्ध उपलब्धता और तकनीकी विश्वसनीयता सबसे बड़ी चुनौती है। बोइंग का सीएसपी (CSP) समाधान एयरलाइन को निम्नलिखित प्रमुख लाभ प्रदान करेगा:
- ग्लोबल कंपोनेंट पूलिंग: एयर इंडिया को बोइंग के पुर्जों के वैश्विक पूल तक तत्काल पहुंच मिलेगी, जिससे खराब पार्ट्स को तेजी से बदला जा सकेगा और विमानों का ‘ग्राउंडेड टाइम’ कम होगा।
- विशेषज्ञ मरम्मत और ओवरहॉल: बेड़े के सभी कंपोनेंट्स की मरम्मत और अपग्रेड बोइंग-अनुमोदित केंद्रों पर किए जाएंगे, जिससे सुरक्षा और प्रदर्शन के उच्चतम मानक बने रहेंगे।
- लागत नियंत्रण: इस साझेदारी से एयरलाइन पुर्जों के रखरखाव पर होने वाले खर्च का सटीक अनुमान लगा सकेगी, जिससे वित्तीय प्रबंधन बेहतर होगा।
भविष्य के बेड़े की तैयारी एयर इंडिया के मुख्य तकनीकी अधिकारी (CTO) शिशिरा कांत दास ने कहा, “एक वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी करियर बनने के लिए भरोसेमंद कंपोनेंट सपोर्ट अनिवार्य है। बोइंग के साथ यह समझौता यात्रियों को निरंतर उत्कृष्ट सेवा प्रदान करने की हमारी प्रतिबद्धता को मजबूत करता है।” यह सहयोग एयर इंडिया के व्यापक आधुनिकीकरण अभियान का हिस्सा है, जिसमें 2026 में नए 787-9 विमानों की डिलीवरी और पुराने 787-8 बेड़े के केबिन अपग्रेड शामिल हैं।
बोइंग ग्लोबल सर्विसेज के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट विलियम एम्पोफो ने इस साझेदारी को रेखांकित करते हुए कहा कि यह ड्रीमलाइनर बेड़े के लिए लागत प्रभावी और लचीला संचालन सुनिश्चित करने की बोइंग की प्रतिबद्धता का हिस्सा है। इस समझौते के साथ, एयर इंडिया अब अपने विमानों के तकनीकी रखरखाव की चिंता किए बिना वैश्विक गंतव्यों तक अपने पंख फैलाने पर ध्यान केंद्रित कर सकेगी।


