घंसौर/सिवनी/ मनोज नामदेव/ खबर डिजिटल/ नगर की वर्षों पुरानी पीड़ा एक बार फिर जनसुनवाई में फूट पड़ी। क्षेत्र के व्यापारियों और आम नागरिकों का प्रतिनिधिमंडल कलेक्टर के समक्ष पहुंचा और बस स्टैंड में बसों का ठहराव न होने की गंभीर समस्या को मजबूती से उठाया। प्रतिनिधिमंडल ने साफ शब्दों में कहा कि यदि बसों का स्टॉप बनाए गए बस स्टैंड पर शीघ्र शुरू नहीं हुआ, तो दर्जनों गरीब परिवारों का रोजगार पूरी तरह समाप्त हो जाएगा।
बस स्टैंड है, लेकिन उपयोग शून्य
वर्ष 2007 में तत्कालीन कलेक्टर द्वारा शांति नगर क्षेत्र में आधुनिक सुविधाओं से युक्त बस स्टैंड का निर्माण कराया गया था। यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए यहां शुद्ध पेयजल, यात्री प्रतीक्षालय, शौचालय, दो हैंडपंप, पर्याप्त रोशनी और खुला परिसर उपलब्ध कराया गया। बावजूद इसके, आज यह बस स्टैंड अपनी पहचान खोता जा रहा है, क्योंकि अधिकांश बसें यहां रुकने के बजाय सीधे सड़क किनारे यात्रियों को चढ़ा-उतार रही हैं।
मनमानी का खुला खेल
प्रतिनिधिमंडल का आरोप है कि कुछ बस मालिक और चालक अपने निजी स्वार्थ के चलते बस स्टैंड में बस नहीं रोकते। सड़क किनारे बस रोककर सवारी भरना उनके लिए आसान है, लेकिन इससे न केवल यात्री परेशान होते हैं, बल्कि बस स्टैंड पर निर्भर व्यापारियों की आजीविका भी चौपट हो रही है।
गरीब परिवारों पर सीधा हमला
बस स्टैंड परिसर से जुड़े क्षेत्र में लगभग 25 से 30 परिवार छोटे-छोटे व्यवसाय—चाय-नाश्ता, पान, होटल, जनरल स्टोर, ठेले और अन्य दुकानों के माध्यम से अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे। इनमें से अधिकांश परिवार गरीबी रेखा के आसपास जीवन यापन कर रहे हैं। बसों का ठहराव बंद होने से इन दुकानों पर ग्राहक आना लगभग बंद हो गया है।
व्यापार 10 प्रतिशत भी नहीं बचा
व्यापारियों ने जनसुनवाई में बताया कि पहले जहां दिनभर यात्रियों की आवाजाही से दुकानें गुलजार रहती थीं, वहीं अब व्यापार महज 10 प्रतिशत पर सिमट गया है। हालात इतने खराब हो चुके हैं कि कई दुकानदार दुकानें बंद कर पलायन करने की तैयारी में हैं।
यात्रियों की भी दुर्दशा
सिर्फ व्यापारी ही नहीं, यात्री भी इस अव्यवस्था से परेशान हैं। सड़क पर बस रुकते ही यात्रियों को दौड़कर बस पकड़नी पड़ती है। बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे खासतौर पर असुरक्षित स्थिति में आ जाते हैं। कई बार अफरा-तफरी में हादसे की नौबत तक आ जाती है।
नियमों की खुलेआम अनदेखी
प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट किया कि शासन के नियमों के अनुसार बसों का ठहराव केवल अधिकृत बस स्टैंड पर ही होना चाहिए। इसके बावजूद वर्षों से नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। न तो बस मालिकों पर कार्रवाई हो रही है, न ही परिवहन विभाग इस ओर गंभीर नजर आ रहा है।
प्रशासनिक चुप्पी पर सवाल
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इस मुद्दे को लेकर पहले भी तहसीलदार, एसडीएम और अन्य अधिकारियों को कई बार ज्ञापन सौंपे जा चुके हैं, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। प्रशासन की इस चुप्पी ने बस मालिकों के हौसले और बुलंद कर दिए हैं।
पलायन की कगार पर घंसौर
यदि स्थिति ऐसी ही बनी रही, तो आने वाले दिनों में बस स्टैंड क्षेत्र वीरान हो जाएगा। जिन परिवारों ने वर्षों मेहनत कर छोटे-छोटे व्यापार खड़े किए, वे मजबूरी में अपने घर-दुकान छोड़कर पलायन करने को विवश होंगे। यह सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि सामाजिक संकट भी बनता जा रहा है।
प्रतिनिधिमंडल की दो टूक मांग
जनसुनवाई में प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन से स्पष्ट मांग की कि—
सभी बसों का ठहराव अनिवार्य रूप से शांति नगर बस स्टैंड पर कराया जाए। सड़क किनारे अवैध स्टॉपेज तत्काल बंद किए जाएं, नियम तोड़ने वाले बस मालिकों पर सख्त कार्रवाई हो, बस स्टैंड क्षेत्र के व्यापारियों को संरक्षण दिया जाए।
गरीबों का हक छीना नहीं जाए
प्रतिनिधिमंडल ने भावुक शब्दों में कहा कि बस स्टैंड केवल ईंट-सीमेंट की इमारत नहीं, बल्कि दर्जनों गरीब परिवारों की रोजी-रोटी है। यदि यहां बसें नहीं रुकेंगी, तो यह सीधा-सीधा गरीबों के हक पर डाका होगा।
अब निगाहें प्रशासन पर
जनसुनवाई में समस्या सामने आने के बाद अब गेंद प्रशासन के पाले में है। देखना यह होगा कि क्या इस बार बस मालिकों की मनमानी पर लगाम लगेगी, या फिर घंसौर के व्यापारी यूं ही उजड़ते रहेंगे।
जनता का सवाल
घंसौर की जनता आज एक ही सवाल पूछ रही है—
जब बस स्टैंड बना है, तो बसें रुकेंगी कहां?
यदि समय रहते ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो यह मुद्दा आने वाले दिनों में और बड़ा जनआंदोलन बन सकता है।


