बुधनी/ कन्हैया नाथ/ खबर डिजिटल/ नर्मदा तट पर स्थित बुधनी नगर परिषद एक बार फिर विवादों के घेरे में है। हाल ही में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के अंतर्गत वार्ड क्रमांक 10, 11 और 15 के हितग्राहियों को आवास प्रमाण पत्र वितरित किए गए। योजना के तहत पहली किस्त के रूप में 1 लाख रुपये की राशि खातों में जमा होनी है। विवाद तब शुरू हुआ जब यह बात सामने आई कि ये तीनों वार्ड कथित तौर पर नर्मदा नदी के प्रतिबंधित ग्रीन बेल्ट क्षेत्र में आते हैं।
अधिवक्ता की चेतावनी
एनजीटी (जबलपुर) के अधिवक्ता प्रभात कुमार यादव ने स्पष्ट किया है कि कोर्ट के आदेशानुसार नर्मदा नदी के 300 मीटर के दायरे में किसी भी प्रकार का नया निर्माण पूरी तरह प्रतिबंधित है। यदि इन नियमों का उल्लंघन कर निर्माण किया जाता है, तो भविष्य में एनजीटी न केवल मकान तोड़ने का आदेश दे सकती है, बल्कि इसकी आर्थिक क्षतिपूर्ति भी संबंधित अधिकारियों से वसूल की जा सकती है। अधिवक्ता के अनुसार, पूर्व में पटवारी सर्वे के दौरान इन क्षेत्रों को ग्रीन बेल्ट के रूप में चिन्हित किया गया था।

अधिकारियों ने साधी चुप्पी
इस संवेदनशील मामले पर स्थानीय प्रशासन जवाब देने से बच रहा है। नगर परिषद के मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) ने जानकारी देने से इनकार कर दिया, जबकि एसडीएम बुधनी, दिनेश तोमर ने स्पष्ट किया कि 300 मीटर के दायरे में निर्माण की वैधता और आवास राशि के आवंटन पर अंतिम निर्णय केवल जिला कलेक्टर ही ले सकते हैं। स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि नियमों की स्पष्टता होने तक राशि के वितरण पर तत्काल रोक लगाई जाए।
