डिंडोरी/शैलेश नामदेव/खबर डिजिटल/ डिंडोरी जिले से भ्रष्टाचार और प्रशासनिक अराजकता की एक चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। मामला महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत बनाए गए परकुलेशन टैंकों से जुड़ा है, जहां सरकारी बंजर भूमि पर निर्माण होना था, लेकिन टैंक निजी भू-स्वामियों के खेतों में बना दिए गए। इस पूरे प्रकरण में करीब 27.95 लाख रुपये की राशि के दुरुपयोग का आरोप है।
ग्राम पंचायत पौंडीमाल का मामला
मामला जनपद पंचायत डिंडोरी की ग्राम पंचायत पौंडीमाल का है। मीडिया में खबर आने के बाद 13 फरवरी 2026 को जांच दल मौके पर पहुंचा। तकनीकी परीक्षण और स्थल निरीक्षण के बाद जो तथ्य सामने आए, उन्होंने अधिकारियों को भी हैरान कर दिया।
जांच में सामने आए तीन बड़े घपले
गोयरा रैयत: निजी जमीन पर बना ‘सरकारी’ टैंक
यहां 9.99 लाख की स्वीकृति दी गई थी, जिसमें से 8.72 लाख खर्च भी हो चुके हैं। लेकिन पैमाइश के दौरान पाया गया कि पूरा निर्माण किसी व्यक्ति की निजी भूमि पर किया गया है।
पौंडीमाल: आधा सरकारी, आधा निजी
इस कार्य के लिए ₹10.72 लाख की स्वीकृति मिली थी और ₹10.66 लाख की राशि आहरित कर ली गई। जांच में सामने आया कि टैंक का निर्माण आंशिक रूप से सरकारी भूमि पर और आंशिक रूप से एक किसान के निजी खेत में किया गया है।
नयेगांव रैयत: बजट खर्च, नियम दरकिनार
₹9.99 लाख के स्वीकृत बजट में से ₹8.57 लाख खर्च कर टैंक निजी भूमि में बना दिया गया। यहां भी भूमि स्वामी की कोई लिखित सहमति नहीं ली गई।
नियमों की अनदेखी, सहमति तक नहीं ली गई
मनरेगा के दिशा-निर्देशों के अनुसार, निजी भूमि पर किसी भी प्रकार का कार्य करने के लिए भूमि स्वामी की विधिवत लिखित सहमति अनिवार्य है। लेकिन जांच में पाया गया कि न तो सहमति ली गई और न ही नियमानुसार प्रक्रिया का पालन किया गया। इसे शासकीय राशि के गबन और निजी संपत्ति पर अवैध निर्माण की श्रेणी में माना जा रहा है।
चार जिम्मेदारों की भूमिका संदिग्ध
जांच रिपोर्ट में उपयंत्री कमलेश धुमकेती, ग्राम रोजगार सहायक भगत लाल हथेश्वर, पूर्व सचिव जोहन लाल कोरवा और सरपंच बिसमतिया बाई की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। आरोप है कि बिना साइट वेरिफिकेशन के तकनीकी और प्रशासनिक स्वीकृतियां जारी कर दी गईं। जिला पंचायत CEO ने उपयंत्री और GRS को कारण बताओ नोटिस जारी कर 48 घंटे में जवाब तलब किया है। संतोषजनक जवाब न मिलने पर सेवा समाप्ति की कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
अब राजस्व विभाग की जांच निर्णायक
जांच दल ने संबंधित खसरा नंबरों और रकबे के सत्यापन के लिए राजस्व विभाग (पटवारी) से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। यदि यह प्रमाणित होता है कि निर्माण जानबूझकर किसी विशेष व्यक्ति को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से किया गया, तो प्रशासन ₹27.95 लाख की वसूली की कार्रवाई कर सकता है।
बड़ा सवाल: क्या यह खेल सिर्फ एक पंचायत तक सीमित?
स्थानीय गलियारों में चर्चा है कि इतने बड़े पैमाने पर बिना उच्चाधिकारियों की मौन सहमति के यह संभव कैसे हुआ? क्या यह भ्रष्टाचार केवल एक ग्राम पंचायत तक सीमित है या जिले की अन्य पंचायतों में भी ‘निजी मेहरबानी’ का खेल चल रहा है? अब सबकी नजर प्रशासनिक कार्रवाई और वसूली प्रक्रिया पर टिकी है।
