मुंबई : गोदरेज डीईआई (DEI) लैब के प्रमुख परमेश शाहनी ने भारत के औद्योगिक भविष्य में महिलाओं की भूमिका पर अपने विचार साझा करते हुए कहा कि विनिर्माण क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी देश के आर्थिक सपनों को साकार करने के लिए अनिवार्य है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, भारत के विनिर्माण कार्यबल में महिलाओं की हिस्सेदारी एक-तिहाई से अधिक हो गई है, जबकि 2017-24 के बीच इस क्षेत्र में सृजित नई नौकरियों में तीन-चौथाई योगदान महिलाओं का रहा है। हालांकि, शाहनी ने आगाह किया कि वास्तविक समावेशन के लिए अभी भी शॉप फ्लोर की संरचना में व्यापक बदलाव की आवश्यकता है, ताकि वे महिलाओं की सुरक्षा और बुनियादी जरूरतों के अनुकूल बन सकें।
शाहनी ने सुरक्षा, बुनियादी सुविधाओं और लचीली कार्यशैली को महिलाओं की कार्यबल भागीदारी बनाए रखने के लिए तीन मुख्य स्तंभ बताया। उन्होंने अंबरनाथ स्थित गोदरेज केमिकल्स प्लांट का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां महिलाओं की संख्या 4 से बढ़कर 40 हो गई, लेकिन ऐसे सफल उदाहरण पूरे उद्योग में अभी भी अपवाद ही हैं। उन्होंने वर्ल्ड बैंक के आंकड़ों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि यदि कार्यबल में महिलाओं की भागीदारी 50% तक पहुंचती है, तो भारत की वार्षिक जीडीपी वृद्धि में 1.5 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी हो सकती है। सुरक्षा के लिए एंटी-हैरासमेंट व्यवस्था, सुरक्षित आवागमन, और कार्यस्थल के डिजाइन (जैसे मशीनों की ऊंचाई और सुरक्षा उपकरण) को महिलाओं के अनुरूप बनाना इस दिशा में क्रांतिकारी कदम साबित हो सकते हैं।
अंततः, शाहनी ने इस बात पर जोर दिया कि ‘नारी शक्ति’ केवल एक नारा नहीं, बल्कि भारत के औद्योगिक इंजन की असली ऊर्जा है। महिलाओं के लिए सुरक्षित, सम्मानित और सशक्त वातावरण तैयार करना केवल सामाजिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि एक ठोस आर्थिक रणनीति है। परिवारों और समुदायों का सहयोग इस बदलाव को कारखाने की दीवारों से बाहर ले जाएगा, जिससे महिलाएं पारंपरिक रूप से पुरुष-प्रधान क्षेत्रों में भी नेतृत्व कर सकेंगी।
