मुंबई : भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के आर्थिक अनुसंधान विभाग ने अपनी नवीनतम रिपोर्ट (अंक #42) में अनुमान जताया है कि वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही (Q3 FY26) में भारत की वास्तविक जीडीपी (GDP) विकास दर 8.1% रह सकती है । वैश्विक प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद, भारतीय अर्थव्यवस्था ने अपनी मज़बूत विकास गति को बनाए रखा है ।
रिपोर्ट की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:
- मज़बूत घरेलू मांग और खपत: वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में आर्थिक गतिविधियों के उच्च-आवृत्ति डेटा (High-frequency data) लचीलेपन का संकेत देते हैं । ग्रामीण खपत में मज़बूती बनी हुई है, वहीं शहरी खपत में पिछले त्योहारी सीजन के बाद से लगातार सुधार देखा जा रहा है । 50 अग्रणी संकेतकों (Leading Indicators) में से 87% संकेतक तीसरी तिमाही में तेज़ी का रुख दिखा रहे हैं ।
- जीडीपी आधार वर्ष में संशोधन: भारत अपने जीडीपी आधार वर्ष को 2011-12 से बदलकर 2022-23 करने जा रहा है, जिसकी नई श्रृंखला 27 फरवरी 2026 को जारी होगी 。 यह संशोधन डिजिटल वाणिज्य और सेवा क्षेत्र जैसी नई आर्थिक संरचनाओं को बेहतर ढंग से प्रतिबिंबित करेगा । नई पद्धति में अनौपचारिक क्षेत्र के बेहतर मापन और जीएसटी (GST) जैसे डेटा स्रोतों का उपयोग शामिल होगा, जो भारत को दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बना सकता है 。
- बैंकिंग क्षेत्र का प्रदर्शन: सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक (PSBs) लाभप्रदता के संकेतकों में निजी बैंकों से आगे चल रहे हैं । एसबीआई (SBI), बैंक ऑफ महाराष्ट्र (BOM) और इंडियन ओवरसीज बैंक (IOB) जैसे बैंकों का ग्रॉस एनपीए (GNPA) 2% से नीचे बना हुआ है । हालांकि, जमा वृद्धि (Deposits) की तुलना में ऋण वृद्धि (Credit) अधिक बनी हुई है, जिससे क्रेडिट-डिपाजिट (CD) अनुपात 82.29% के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुँच गया है ।
- वैश्विक आर्थिक परिवेश: वैश्विक विकास दर 2025 और 2026 दोनों के लिए 3.3% अनुमानित है । हालांकि, अमेरिकी प्रशासन द्वारा आयात पर लगाए गए नए 10-15% वैश्विक टैरिफ और भू-राजनीतिक तनावों के कारण अनिश्चितता बनी हुई है ।
एसबीआई के ग्रुप मुख्य आर्थिक सलाहकार डॉ. सौम्य कांति घोष के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 के लिए जीडीपी विकास दर 7.4% रहने का अनुमान है, जो मुख्य रूप से घरेलू मांग से प्रेरित है । रिपोर्ट यह भी संकेत देती है कि वित्त वर्ष 2027 के दौरान भारत की संभावित जीडीपी 6.8-7.2% के बीच रह सकती है ।


