रेल, सूचना एवं प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने आज नई दिल्ली स्थित रेल भवन से वर्चुअल माध्यम के ज़रिए ट्रेन संख्या 11631/32 भोपाल-धनबाद-भोपाल नई त्रि-साप्ताहिक एक्सप्रेस और ट्रेन संख्या 11633/34 भोपाल-चोपन-भोपाल नई साप्ताहिक एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह मध्य प्रदेश और आसपास के राज्यों में रेल संपर्क और यात्रियों की सुविधा बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
इस परियोजना का शुभारंभ समारोह भोपाल रेलवे स्टेशन पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, उपमुख्यमंत्री श्री जगदीश देवड़ा और श्री राजेंद्र शुक्ला, संसद सदस्य श्री आलोक शर्मा और डॉ. राजेश मिश्रा, विधानसभा सदस्य श्रीमती राधा सिंह और श्रीमती रीति पाठक और अन्य गणमान्य व्यक्तियों की गरिमामय उपस्थिति में आयोजित किया गया।
रेल यात्रियों की सुविधा और मध्य प्रदेश से उत्तर प्रदेश और झारखंड के लिए सीधे संपर्क की बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए ये नई रेल सेवाएं शुरू की गई हैं।
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श्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि प्रधानमंत्री के ऐतिहासिक तीसरे कार्यकाल के दौरान मध्य प्रदेश में रेल विकास अभूतपूर्व स्तर पर पहुंच गया है। उन्होंने बताया कि इस दौरान मध्य प्रदेश से सीधे जुड़ने वाली लगभग 48,000 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है।
श्री वैष्णव ने कहा कि क्षेत्र के लिए एक बहुप्रतीक्षित परियोजना, इंदौर-मनमाड़ नई रेलवे लाइन को 18,000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से मंजूरी दी गई है। भुसावल-खंडवा तीसरी और चौथी लाइन परियोजना को 3,500 करोड़ रुपये की लागत से मंजूरी दी गई है, जबकि प्रयागराज-मानिकपुर तीसरी लाइन परियोजना को 1,640 करोड़ रुपये की लागत से मंजूरी दी गई है। रतलाम-नागदा तीसरी और चौथी लाइन परियोजना को 1,000 करोड़ रुपये की लागत से मंजूरी दी गई है।
इसके अलावा, इटारसी-नागपुर चौथी रेलवे लाइन परियोजना को 5,400 करोड़ रुपए की लागत से मंजूरी दी गई है। महत्वपूर्ण इटारसी-भोपाल-बीना चौथी लाइन कॉरिडोर, जो एक बेहद व्यस्त मार्ग है, उसे 4,300 करोड़ रुपए की लागत से स्वीकृत किया गया है। वडोदरा-रतलाम तीसरी और चौथी लाइन परियोजना को 8,800 करोड़ रुपए की लागत से मंजूरी दी गई है। उन्होंने बताया कि कैबिनेट ने 5,200 करोड़ रुपए की लागत से गोंडिया-जबलपुर दोहरीकरण परियोजना को भी मंजूरी दे दी है।
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इसनके अलावा जारी अन्य प्रमुख परियोजनाओं में रामगंज मंडी-भोपाल, ललितपुर-सिंगरौली, इंदौर-बुडनी, बीना-कटनी तीसरी लाइन, सतना-रीवा और कटनी-सिंगरौली दोहरीकरण, कटनी ग्रेड सेपरेटर और गेज रूपांतरण परियोजनाएं शामिल हैं, जिनसे रेल क्षमता, समयबद्धता और माल ढुलाई में उल्लेखनीय सुधार होगा।
माल ढुलाई और रसद दक्षता बढ़ाने के लिए, केंद्रीय बजट में पश्चिम बंगाल के डंकुनी से गुजरात के सूरत तक एक नए समर्पित माल ढुलाई गलियारे का प्रस्ताव रखा गया है, जो ओडिशा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र से होकर गुजरेगा। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि यह नया माल ढुलाई गलियारा मध्य प्रदेश के बड़े पैमाने पर औद्योगिक विकास के लिए एक मजबूत आधार बनेगा। 2,052 किलोमीटर लंबा यह पूर्व-पश्चिम गलियारा, मौजूदा पश्चिमी समर्पित माल ढुलाई गलियारे से जुड़ेगा, जिससे पश्चिमी बंदरगाहों तक माल की निर्बाध आवाजाही बेहतर हो पाएगी, मौजूदा रेल नेटवर्क पर दबाव कम होगा और औद्योगिक विकास में तेजी आएगी।
उन्होंने कहा कि इस कॉरिडोर के ज़रिए मध्य प्रदेश पश्चिमी तट के प्रमुख बंदरगाहों से बेहतर ढंग से जुड़ पाएगा, जिनमें गुजरात और महाराष्ट्र के बंदरगाह भी शामिल हैं। महाराष्ट्र में बन रहा वधवन बंदरगाह, जिसके पूरा होने पर दुनिया के सबसे बड़े बंदरगाहों में से एक होने की उम्मीद है, और हजीरा और मुंद्रा जैसे मौजूदा बंदरगाह भी साथ मिलकर राज्य की कनेक्टिविटी को और बेहतर बनाएंगे।
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इन बंदरगाहों से उच्च गति के माल ढुलाई संपर्क के साथ, मध्य प्रदेश के उद्योगों को कंटेनरीकृत कार्गो या थोक वस्तुओं के निर्यात और आयात दोनों कार्यों में काफी लाभ होगा। इस बेहतर लॉजिस्टिक्स प्रणाली से राज्य में औद्योगिक विकास में तेजी आने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नवनिर्मित रेल सेवा के शुरू होने पर प्रसन्नता जताई, जिससे सिंगरौली को प्रतिदिन रेल कनेक्टिविटी मिलेगी। उन्होंने इस विकास को क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपहार बताया। उन्होंने श्री अश्विनी वैष्णव का आभार व्यक्त किया और कहा कि सिंगरौली के अलावा, यह ट्रेन सिंगरौली और धनबाद के बीच यात्रा करने वाले लोगों को भी लाभ पहुंचाएगी, जहां कई निवासी व्यापार, व्यवसाय और रोजगार के ज़रिए जुड़े हुए हैं।
डॉ. यादव ने कहा कि इस सेवा के शुरू होने से झारखंड और बिहार के साथ सीधा रेल संपर्क स्थापित हो गया है, जिससे तीनों राज्यों के निवासियों को लाभ होगा। उन्होंने कहा कि यह नई रेल सेवा केवल एक परिवहन सुविधा नहीं, बल्कि भविष्य के विकास का मार्ग प्रशस्त करती है।
भोपाल-धनबाद-भोपाल नई त्रि-साप्ताहिक एक्सप्रेस (ट्रेन संख्या 11631/32)
यह ट्रेन भोपाल और धनबाद के बीच कुल 30 स्टेशनों पर रुकेगी। नियमित सेवा के तहत, यह भोपाल से 20:55 बजे प्रस्थान करेगी और अगले दिन 20:30 बजे धनबाद पहुंचेगी। वापसी में, यह धनबाद से 07:20 बजे प्रस्थान करेगी और अगले दिन 07:00 बजे भोपाल पहुंचेगी।
इस ट्रेन में एसी, स्लीपर और जनरल क्लास के कुल 24 कोच होंगे।
भोपाल-चोपन-भोपाल नई साप्ताहिक एक्सप्रेस (ट्रेन संख्या 11633/34)
यह ट्रेन भोपाल और चोपन के बीच 15 स्टेशनों पर रुकेगी। नियमित सेवा के तहत, यह भोपाल से रात 8:55 बजे प्रस्थान करेगी और अगले दिन सुबह 10:50 बजे चोपन पहुंचेगी। वापसी में, यह चोपन से शाम 17:10 बजे प्रस्थान करेगी और अगले दिन सुबह 7:00 बजे भोपाल पहुंचेगी।
इस ट्रेन में एसी, स्लीपर और जनरल क्लास के कोचों सहित कुल 24 कोच होंगे।
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नई ट्रेन सेवाओं के लाभ
नई ट्रेन सेवाओं से विदिशा, गंज बसोदा, बीना, सागर, दमोह, कटनी मुरवारा, खन्ना बंजारी, ब्योहरी, सिंगरौली, चोपन, चंद्रपुरा और धनबाद आदि के लिए सीधी कनेक्टिविटी मिलेगी।
ये ट्रेनें मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और झारखंड के बीच संपर्क को मजबूत करेंगी और सिंगरौली कोयला क्षेत्रों और औद्योगिक क्षेत्रों को राजधानी भोपाल से जोड़ेंगी। इन सेवाओं से तीनों राज्यों में व्यापार, ऊर्जा और खनन क्षेत्रों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
यात्रियों को सुविधाजनक, सुरक्षित और भरोसेमंद रेल सेवाओं का लाभ मिलेगा, जिससे संतुलित क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा मिलेगा। नई ट्रेनें पर्यटन, स्थानीय व्यापार, उद्योग और शिक्षा को भी बढ़ावा देंगी और दैनिक यात्रियों और आने-जाने वाले यात्रियों के लिए सुगम यात्रा सुनिश्चित करेंगी।
इन ट्रेनों का शुभारंभ सरकार की रेल अवसंरचना को मजबूत करने, यात्री सुविधाओं को बढ़ाने और क्षेत्रों के बीच निर्बाध संपर्क सुनिश्चित करने की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
