वैश्विक पेशेवर लेखा निकाय, एसीसीए (ACCA) ने अपनी नवीनतम रिपोर्ट ‘सस्टेनेबिलिटी रिपोर्टिंग: वर्किंग विद एस्टीमेट्स’ के माध्यम से संगठनों के लिए एक व्यावहारिक मार्गदर्शन जारी किया है। रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि डेटा की कमी या अधूरापन सस्टेनेबिलिटी (संवहनीयता) रिपोर्टिंग की राह में रुकावट नहीं बनना चाहिए। एसीसीए का सुझाव है कि जब सटीक आंकड़े उपलब्ध न हों, तो संगठन भविष्य की रणनीति और निर्णयों के लिए ‘तार्किक और समर्थनीय जानकारी’ (Reasonable Estimates) का प्रभावी ढंग से उपयोग कर सकते हैं। यह रिपोर्ट उन चुनौतियों का समाधान पेश करती है जहाँ डेटा अनिश्चित या अनुपलब्ध है, जिससे संगठनों को अपनी रिपोर्टिंग यात्रा को बिना रुके आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।
एसीसीए इंडिया के निदेशक, मोहम्मद साजिद खान ने इस पहल पर टिप्पणी करते हुए कहा कि भारत में विकसित होते सस्टेनेबिलिटी ढांचे के बीच व्यवसायों को अक्सर अधूरे डेटासेट के साथ काम करना पड़ता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शुरुआत में ‘पूर्णता’ (Perfection) से अधिक महत्वपूर्ण पारदर्शिता और निरंतर सुधार के प्रति प्रतिबद्धता है, जहाँ वित्त पेशेवर अपनी विशेषज्ञता से इस जानकारी में अनुशासन और विश्वसनीयता लाते हैं। रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि बेहतर डेटा गुणवत्ता के लिए संगठनों को अपनी वैल्यू चेन के साथ सहयोग करना चाहिए और डेटा संग्रह के लिए एकीकृत सिस्टम डिजाइन करने चाहिए। एसीसीए का मानना है कि जैसे-जैसे ज्ञान और तकनीक का विस्तार होगा, ये ‘तार्किक अनुमान’ समय के साथ अधिक परिष्कृत और सटीक होते जाएंगे, जो अंततः अधिक उपयोगी वित्तीय और सामाजिक निर्णय लेने में सहायक सिद्ध होंगे।


