भोपाल/सुनील बंशीवाल/खबर डिजिटल/ मध्यप्रदेश विधानसभा में आज कांग्रेस विधायकों ने मुख्यमंत्री कन्यादान विवाह योजना में गरीबी रेखा (बीपीएल) कार्ड की अनिवार्यता का मुद्दा प्रमुखता के साथ उठाया था, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर सुर्खियां बटोर रहा है, इसमें आम जनता की खुलकर राय निकलकर सामने आ रही है, क्योंकि इसके कारण कई जरुरतमंद लोगों को कर्ज लेकर महंगी शादियां करना पड़ रही है, जबकि पहले ऐसा नहीं हुआ करता था।
कांग्रेस विधायक सतीश सिकरवार ने की थी मांग
विधानसभा के बजट सत्र के प्रश्नकाल के दौरान कांग्रेस विधायक सतीश सिकरवार ने कहा कि मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना में बीपीएल कार्ड की अनिवार्यता के कारण गरीब कन्याओं के विवाह नहीं हो पा रहे। उन्होंने कहा कि ग्वालियर में इस बार बसंत पंचमी, फुलेरा दूज जैसे अवसरों पर सामूहिक विवाह के लिए जोड़े ही उपलब्ध नहीं हुए। जिसे उन्हें काफी गंभीर बताया और सरकार के लाड़ली बहनों से अन्याय की बात कही। कांग्रेस के एक और विधायक विवेक पटेल ने कहा कि बीपीएल कार्ड की अनिवार्यता के साथ ही 100 जोड़ों की सीमा तय कर दी गई है। उसके कारण भी जरुरतमंदों को इंतजार करने के सिवा कुछ हासिल नहीं हो रहा है।
मामले में संबंधित मंत्री ने दिया जवाब
सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन कल्याण मंत्री नारायण सिंह कुशवाह ने सवाल का जवाब देते हुए कहा कि कई जनप्रतिनिधियों की ओर से भी इस योजना में भ्रष्टाचार से जुड़ी शिकायतें सामने आईं थीं, जिसके बाद कुछ मानदंड तय किए गए हैं। कई बार लोगों के दोबारा विवाह और निकाह की भी शिकायतें आईं थी। अब बदले हुए मानदंड से सामने आ रही बातों को मुख्यमंत्री डॉ. यादव के समक्ष रखा जाएगा।
सवाल उठा रहे लोग
सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर जमकर बहस छिड़ गई है क्योंकि फर्जी शादियों का समाधान बीपीएल कार्ड की अनिवार्यता लगाकर नहीं सही किया जा सकता है, साथ ही कहा जा रहा है कि आर्थिक संबल से जुड़ी इस योजना का लाभ विशेषकर दलित, पिछड़ो, आदिवासियों और आर्थिक रुप से पिछड़ों को नहीं मिल पा रहा है, जिसके कारण उनको भारी आर्थिक हानि उठाना पड़ रही है, और धनाढ्यों की जेब मोटी होती जा रही है।


