भोपाल/सुनील बंशीवाल/खबर डिजिटल/ आदिवासियों को लेकर तमाम तरह की सियासत चलती रहती है, कभी इनके विकास के मुद्दे पर बात होती है, तो कभी कहा जाता है कि ये अन्य किसी भी धर्म से ताल्लुक रखते हैं, इसी बात को आगे बढ़ाने का काम मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आदिवासियों के अस्तित्व और संवैधानिक अधिकारों की दुहाई देते हुए अलग धर्म कोड की मांग की है। सिंघार ने राष्ट्रपति के नाम 50 लाख आवेदन भेजने का लक्ष्य रखा है, जोकि आगामी सियासत के लिए बेहद की महत्वपूर्ण हो जाएगा, क्योंकि राष्ट्रपति भी आदिवासी वर्ग से आती हैं।
जनजातीय सम्मेलन में बोले सिंघार
अनूपपुर में आयोजित एक जनजातीय सम्मेलन में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आदिवासियों के लिए अलग धर्म कोड की मांग उठाकर सत्ता के गलियारों में हलचल तेज कर दी है। सिंघार ने दो टूक कहा कि यदि आदिवासियों को अन्य धर्मों के तहत गिना जाता रहा, तो भविष्य में उनकी विशिष्ट पहचान और संवैधानिक अधिकार दोनों मिट जाएंगे, जोकि आदिवासी अस्मिता की बात को उजागर करता है।
जनगणना पर भी दिखा फोकस
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आदिवासियों को आगाह किया कि जनगणना के दौरान अपनी अलग पहचान दर्ज कराना अस्तित्व की लड़ाई है। उन्होंने जनता से सीधा संवाद करते हुए कहा कि मध्य प्रदेश से कम से कम 50 लाख आवेदन राष्ट्रपति के पास पहुंचने चाहिए ताकि दिल्ली को आदिवासियों की ताकत का अहसास हो। उनका तर्क है कि अगर आदिवासी समुदाय अन्य धर्मों में विलीन हो गया, तो आरक्षण और वन अधिकार जैसे सुरक्षा कवच कमजोर पड़ जाएंगे।
मध्यप्रदेश में आदिवासियों की कितनी आबादी
एमपी में आदिवासी वर्ग की कुल आबादी पिछली जनगणना के अनुसार लगभग 21% से 22% है, वहीं इस वर्ग के लिए 230 विधानसभा सीटों में से 47 सीटें आरक्षित की गई है, इसके साथ ही यह वर्ग लगभग 80% सीटों को प्रभावित करता है, जिसके चलते इस वर्ग को साधने की कोशिश सबसे ज्यादा की जाती है, इसी का नतीजा है कि आदिवासी वर्ग से आने वाले नेता प्रतिपक्ष ने आदिवासी वर्ग के लिए नई मांग उठा दी है।
भाजपा ने किया पलटवार
सिंघार के इस बयान पर मोहन सरकार के कैबिनेट मंत्री विश्वास सारंग ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कांग्रेस पर आदिवासियों को गुमराह करने और समाज को बांटने का आरोप लगाया। सारंग ने मांग की है कि जनगणना जैसी संवैधानिक प्रक्रिया में बाधा डालने और भ्रम फैलाने के जुर्म में सिंघार पर आपराधिक मामला दर्ज होना चाहिए।


