भोपाल/सुनील बंशीवाल/खबर डिजिटल/ मध्यप्रदेश के रिटायर कर्मचारियों के लिए खास खबर है कि उन्होंने अगर विसंगतिपूर्ण वेतनमान के बाद सरकार से अधिक राशि ले ली और रिटायर होने के पहले सरकार को अंडरटेकिंग दी है कि वे राशि लौटा दें। उन रिटायर कर्मचारियों और अधिकारियों से सरकार अब पेंशन से वसूली करेगी, क्योंकि रिटायर होने के बाद उन कर्मचारियों ने कोर्ट की शरण ली है, लेकिन अब वित्त विभाग ने सख्ती से निर्देश जारी किए हैं कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आधार पर उससे सरकार वसूली कर सकती है, भले ही वह रिटायर हो चुका है।
वित्त विभाग ने जारी किए निर्देश
वित्त विभाग ने स्पष्ट आदेश जारी किया है कि संचालक पेंशन, भविष्य निधि एवं बीमा मध्यप्रदेश भोपाल तथा सभी संभागीय और जिला पेंशन अधिकारी को राज्य शासन के शासकीय सेवकों के विसंगतिपूर्ण वेतन निर्धारण के चलते होने वाले अधिक भुगतान की वसूली के संबंध सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का पालन किया जाए। इसको लेकर प्रदेश के वित्त विभाग समय-समय पर दिशा-निर्देश पूर्व में भी जारी किये गये हैं, जिसके चलते वसूली की प्रक्रिया के तेज किया जाएगा।
6 साल पुराने आदेश का दिया हवाला
वित्त विभाग ने मामले में सख्ती से निर्देशित किया है कि 12 जून 2020 को एसीएस ने अब संबंधित अफसरों को करीब 6 साल पहले जारी आदेश के आधार पर रिटायर हो चुके कर्मचारियों, अधिकारियों से उस स्थिति में वसूली करने के निर्देश दिए हैं, जिसमें संबंधित अधिकारी कर्मचारी ने अधिक वेतन लाभ लेने पर राशि वापसी की लिखित बात कही गई है। कोर्ट के टिप्पणी के आधार पर कहा गया है कि मध्य प्रदेश में सभी जिला पेंशन अधिकारियों को रफीक मसीह मामले में सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों के साथ-साथ जगदीश प्रसाद के मामले में कोर्ट के निर्णयों से अवगत कराया जाना आवश्यक है।
इस फैसले का असर
जानकारी के मुताबिक जिस केस में यह फैसला हुआ है, इस मामले में प्रतिवादी जगदेव सिंह को संशोधित वेतनमान का विकल्प चुनते समय एक वचन पत्र (Undertaking) देना थास कि यदि भविष्य में कोई अधिक भुगतान पाया जाता है, तो उसे सरकार को लौटा दिया जाएगा। इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने उच्च न्यायालय के उस निर्णय को खारिज कर दिया, जिसने रिकवरी पर रोक लगा दी गई थी। सर्वोच्च न्यायालय में कर्मचारी ने अधिक भुगतान को लौटाने का वचन दिया था, इसलिए वह इसके लिए बाध्य है। जिसका असर अन्य रिटायर कर्मचारियों पर पड़ सकता है।


