डिंडोरी/ शैलेश नामदेव/ खबर डिजिटल/ मीसाबंदी के दौरान 19 महीने जेल की दीवारों के पीछे गुजारने वाले एक बुजुर्ग को, आज अपनी ही जमीन को बचाने के लिए सिस्टम के सामने हाथ जोड़ना पड़ रहा है। शाहपुरा के वरिष्ठ मीसाबंदी जय नारायण साहू ने प्रशासनिक उपेक्षा और सत्ताधारी दल के दबाव से परेशान होकर अपना राजकीय सम्मान “ताम्रपत्र “कलेक्टर को वापस सौंप दिया है।
पूरा मामला शाहपुरा नगर के उमरिया रोड स्थित खसरा नंबर 132 /2की निजी भूमि का है। जय नारायण साहू ने सीधे तौर पर आरोप लगाया है कि, शाहपुरा भाजपा मंडल अध्यक्ष भजन दास चक्रवर्ती के द्वारा उनके पैतृक जमीन पर अवैध रूप से टपरा रखकर, कब्जा कर लिया गया है। पीड़ित का कहना है कि मेरे द्वारा विरोध करने पर उनके साथ न केवल अभद्रता की गई बल्कि मारपीट भी की गई हैं।
26 जनवरी 2018 को तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मुझे “ताम्रपत्र” प्रदान किया था। लेकिन आज भाजपा का ही संगठन मौन बैठा हुआ है, और उनके ही पदाधिकारी हमें प्रताड़ित कर रहे हैं। जय नारायण साहू मीसाबंदी ने आगे बताया कि उन्होंने 4 फरवरी 2026 को एसडीएम, तहसीलदार और थाना प्रभारी को लिखित शिकायत की थी। इसके बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
प्रशासन की नजरअंदाजी से दुखी होकर उन्होंने अपना सर्वोच्च सम्मान “ताम्रपत्र “लौटने का निर्णय लिया हैं। कलेक्टर के सामने जय नारायण साहू ने अपनी आपबीती सुनाते हुए उनकी आंखों से आंसू छलक पडें ।कलेक्टर अंजू पवन भदोरिया ने संवेदनशीलता की मिसाल पेश करते हुए उन्होंने न केवल बुजुर्ग को अपने हाथों से पानी पिलाया बल्कि उन्हें ससम्मान बैठाकर गंभीरता से उनकी पूरी बात सुनी और पुनः सम्मान के साथ ताम्रपत्र वापस सौंपा ।
कलेक्टर ने तुरंत संबंधित अधिकारियों को दो दिनों के अंदर कमेटी बनाकर निष्पक्ष जांच और कार्यवाही के निर्देश दिए। इस पूरी घटना ने जिले की राजनीति और प्रशासन की कार्य प्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मीसाबंदी जय नारायण साहू ने स्पष्ट चेतावनी दी है, कि यदि 10 दिवस के भीतर उनकी निजी जमीन से अवैध कब्जा नहीं हटाया गया, और दोषियों पर कार्यवाही नहीं हुई, तो वह भोपाल स्थित मुख्यमंत्री निवास के सामने आमरण अनशन पर बैठने को मजबूर होंगे ।


