Nagda Santosh OP Gehlot : मध्यप्रदेश के नागदा नगर पालिका अध्यक्ष संतोष ओपी गहलोत को लेकर हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। इंदौर हाईकोर्ट ने उनके वित्तीय अधिकारों पर अंतरिम रोक लगा दी है। हाईकोर्ट के जस्टिस प्रणय वर्मा ने अशोक मावर और राजकुमार राठौर द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया है। कोर्ट कहा है कि जब तक प्रदेश सरकार द्वारा संतोष ओपी गेहलोत के अध्यक्ष पद की अधिसूचना जारी नहीं की जाती, तब तक यह रोक प्रभावी रहेगी।
प्रक्रिया शुल्क जमा करने के निर्देश
याचिकाकर्ताओं की ओर से एडवोकेट अमित राज ने पैरवी करते हुए रिट पिटीशन क्रमांक 10957/2024 का हवाला दिया। उन्होंने कोर्ट को बताया कि समान प्रकृति के एक अन्य मामले में भी पहले अंतरिम राहत दी जा चुकी है। इसी आधार पर अदालत ने इस मामले में भी राहत प्रदान की। कोर्ट ने मामले में संबंधित पक्षों को नोटिस जारी करते हुए सात दिन के अंदर प्रक्रिया शुल्क जमा करने के निर्देश दिए हैं। निर्धारित समय सीमा में शुल्क जमा नहीं होने पर याचिका खारिज मानी जाएगी।
गरमाया राजनीतिक माहौल
आपको बता दें कि नपा अध्यक्ष की कार्यप्रणाली को लेकर बीते साढ़े तीन सालों से विवाद की स्थिति बनी हुई है। खास बात यह है कि मामले पर भाजपा और कांग्रेस, दोनों दलों के पार्षदों में असंतोष देखा जा रहा है। भाजपा की बहुमत वाली परिषद भी अपने पार्षदों को एकजुट रखने में सफल नहीं रही और पार्टी के करीब 12 पार्षदों ने खुलकर विरोध किया। जिसका लाभ विपक्षी कांग्रेस को मिला है।
अविश्वास प्रस्ताव लाने की कोशिश
इससे पहले भाजपा के बागी पार्षदों और कांग्रेस ने मिलकर नपा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की कोशिश की थी, लेकिन राज्य सरकार द्वारा नियमों में बदलाव किए जाने के कारण यह प्रयास सफल नहीं हो सका। अब 20 मार्च को आए हाईकोर्ट के आदेश को दोनों दलों के पार्षद अपनी-अपनी जीत के रूप में देख रहे हैं। साथ ही आने वाले समय में अध्यक्ष पर लगे वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों को उजागर करने के संकेत भी दिए जा रहे हैं।


