P?c1=2&c2=41463588&cv=3.9
Friday, April 17, 2026
No menu items!
spot_img
Homeमध्यप्रदेशकटनीकटनी निगम की समीक्षा बैठक में खुली व्यवस्थाओं की पोल, योजनाओं की...

कटनी निगम की समीक्षा बैठक में खुली व्यवस्थाओं की पोल, योजनाओं की धीमी रफ्तार पर अफसरों की खिंचाई

सौरभ श्रीवास्तव संवाददाता कटनी पीएम स्वनिधि में लापरवाही, जलापूर्ति और फायर सेफ्टी पर सवाल—नोटिस जारी करने के निर्देश

कटनी– नगर निगम की समय-सीमा बैठक में एक बार फिर शहर की जमीनी हकीकत और प्रशासनिक दावों के बीच बड़ा अंतर सामने आया। निगमायुक्त सुश्री तपस्या परिहार द्वारा की गई समीक्षा में कई विभागों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए, जहां योजनाएं कागजों में आगे बढ़ती दिखीं, लेकिन धरातल पर हालात संतोषजनक नहीं पाए गए।प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना की सुस्त प्रगति पर निगमायुक्त ने कड़ी नाराजगी जताते हुए संबंधित प्रभारी को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। यह स्थिति साफ संकेत देती है कि हितग्राहियों तक लाभ पहुंचाने में जिम्मेदार अधिकारी गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं।बैठक में ग्रीष्मकालीन जलापूर्ति को लेकर भी तैयारियों की पोल खुलती नजर आई। पाइपलाइन लीकेज, हैंडपंपों की खराब हालत और वार्डों में पानी के प्रेशर की समस्या जैसे मुद्दे लंबे समय से बने हुए हैं, लेकिन अब तक इनका स्थायी समाधान नहीं हो सका है।फायर सेफ्टी जैसे संवेदनशील मुद्दे पर भी निगम की ढिलाई उजागर हुई। शहर के कई व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और बहुमंजिला भवनों में सुरक्षा मानकों का पालन नहीं हो रहा है, जिससे किसी बड़े हादसे की आशंका बनी हुई है। इसके बावजूद अब तक सख्त कार्रवाई नहीं होना प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े करता है।अनाधिकृत कॉलोनियों के बढ़ते दायरे और बिना अनुमति निर्माण कार्यों पर भी बैठक में चिंता जताई गई, लेकिन हकीकत यह है कि ऐसे मामलों में प्रभावी रोकथाम अब तक नहीं हो सकी है। अवैध प्लॉटिंग का खेल लगातार जारी है और जिम्मेदार विभाग मूकदर्शक बना हुआ है।स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में रही। मच्छरों और मौसमी बीमारियों से निपटने के लिए चलाए जा रहे अभियान अपेक्षित प्रभाव नहीं छोड़ पा रहे हैं, जबकि शहर में आवारा मवेशियों की समस्या भी जस की तस बनी हुई है।कुल मिलाकर, समीक्षा बैठक में सामने आई तस्वीर यह दर्शाती है कि नगर निगम की कई महत्वपूर्ण योजनाएं और व्यवस्थाएं अभी भी धीमी गति और लापरवाही का शिकार हैं। आमजन की समस्याओं के त्वरित निराकरण के दावे फिलहाल कागजों तक ही सीमित नजर आ रहे है

सम्बंधित ख़बरें

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -spot_img

लेटेस्ट