Tuesday, November 3, 2026
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डिंडोरी में आस्था और उल्लास का संगम, भव्य शोभायात्रा के साथ मनाई गई भगवान निषादराज जयंती

डिंडोरी: भक्ति और एकजुटता के साथ संपन्न हुआ निषादराज जन्मोत्सव

शैलेश नामदेव/खबर डिजिटल/डिंडोरी। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के अनन्य मित्र और प्रेम व सेवा के प्रतीक, भगवान निषादराज गुह्य की जन्मोत्सव जयंती डिंडोरी नगर में अत्यधिक श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ मनाई गई। मांझी-केवट समाज के तत्वावधान में आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में भक्ति, परंपरा और सामाजिक एकजुटता का अनुपम संगम देखने को मिला।

​नर्मदा तट से निकली भव्य शोभायात्रा

​उत्सव का शुभारंभ नर्मदा डैम घाट पर विधि-विधान से किए गए पूजन-अर्चन के साथ हुआ। यहां से एक विशाल शोभायात्रा प्रारंभ हुई, जो नगर के मुख्य मार्ग और प्रमुख चौराहों से होकर गुजरी। ढोल-नगाड़ों और डीजे की भक्तिमय धुनों पर श्रद्धालु उत्साह से झूमते रहे। शोभायात्रा में भगवान निषादराज की मनमोहक झांकियां आकर्षण का केंद्र रहीं। नगरवासियों ने जगह-जगह पुष्प वर्षा और आरती कर यात्रा का भव्य स्वागत किया। इस दौरान पूरा शहर जय निषादराज के जयकारों से गूंज उठा।

​प्रतिभाओं का सम्मान और बुजुर्गों का वंदन

​सामाजिक नींव को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से एक विशेष सम्मान समारोह का आयोजन भी किया गया। इसमें समाज के वरिष्ठ जनों ने 10वीं और 12वीं कक्षा में उत्कृष्ट अंक प्राप्त करने वाले मेधावी छात्र-छात्राओं को पुरस्कृत किया। साथ ही, खेल जगत में अपनी पहचान बनाने वाले युवा खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया गया। कार्यक्रम में 60 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गों का उनके मार्गदर्शन के लिए विशेष अभिनंदन किया गया। समाज सेवा में अग्रणी भूमिका निभाने वाले कर्मठ कार्यकर्ताओं को भी मंच से सम्मानित किया गया।

​मैत्री और सेवा का संदेश

​वक्ताओं ने भगवान निषादराज और प्रभु श्री राम की निस्वार्थ मित्रता के पौराणिक प्रसंगों को साझा किया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार वनवास के समय निषादराज गुह्य ने श्री राम, माता सीता और लक्ष्मण को गंगा पार कराकर सेवा का आदर्श प्रस्तुत किया था। समाज के पदाधिकारियों ने बताया कि पिछले 10 वर्षों से लगातार इसी भव्यता के साथ जयंती मनाई जा रही है।

​महाआरती और विशाल भंडारा

​कार्यक्रम का समापन भगवान निषादराज की सामूहिक महाआरती के साथ हुआ, जिसके पश्चात विशाल भंडारे में हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। इस आयोजन ने न केवल धार्मिक आस्था को प्रकट किया, बल्कि सामाजिक समरसता का एक सशक्त संदेश भी दिया।

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