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एक्सिस बैंक मध्य प्रदेश में पारिस्थितिकी के पुनरुद्धार के लिए 5.25 लाख से अधिक स्थानीय प्रजाति के पौधे लगाने में कर रहा है मदद

भोपाल : एक्सिस बैंक ने अंतर्राष्ट्रीय वन दिवस के मौके पर, मध्य प्रदेश में चल रही लैंडस्केप (परिदृश्य) बहाली की पहलों का नेतृत्व कर पर्यावरण संबंधी वहनीयता और जैव विविधता संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को रेखांकित किया है। इन प्रयासों के ज़रिये 2022 से 2030 के बीच, राज्य के ज़्यादा पारिस्थितिक रूप से कुछ सबसे महत्वपूर्ण वन क्षेत्रों में, 750 हेक्टेयर से ज़्यादा ज़मीन पर 5.25 लाख से अधिक पौधे लगाने की योजना के साथ बड़े पैमाने पर पर्यावास (हैबिटैट) बहाली को बढ़ावा दिया जा रहा है।
इस पहल का मुख्य उद्देश्य है, क्षरित (खराब) हो चुके वन पारिस्थितिकी तंत्र को बहाल करना, खास तौर पर उत्तरी शहडोल वन प्रभाग और बांधवगढ़ बाघ अभयारण्य (टाइगर रिज़र्व) में, जो पारिस्थितिकी के लिहाज़ से महत्वपूर्ण मध्य भारतीय बाघ परिदृश्य (लैंडस्केप) का हिस्सा हैं। द कॉर्बेट फाउंडेशन के साथ साझेदारी में लागू किए गए इस कार्यक्रम का लक्ष्य है पर्यावास संपर्क (हैबिटैट कनेक्टिविटी) को बढ़ाना और इस क्षेत्र में कई बाघ हैबिटैट को जोड़ने वाले वन्यजीव गलियारों में दीर्घकालिक पारिस्थितिकी बहाली में मदद करना।


एक्सिस बैंक, इस प्रयास के तहत, 4 साल में 1.50 लाख से अधिक स्थानीय प्रजाति के पौधे लगाने में मदद कर रहा है। ये पौधे बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व और संजय-दुबरी टाइगर रिज़र्व को जोड़ने वाले पारिस्थितिकी गलियारे के भीतर स्थित क्षरित वन्य क्षेत्र में लगाए जाएंगे। यह लैंडस्केप वन्यजीवों के लिए महत्वपूर्ण मार्ग हैं, जिससे बाघों और अन्य प्रजातियों को गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान और तमोर पिंगला वन्यजीव अभयारण्य जैसे संरक्षित क्षेत्रों के बीच आवाजाही करने में मदद मिलती है। इसलिए, जैव विविधता संरक्षण और जलवायु लचीलेपन के लिए इस गलियारे की बहाली बहुत ज़रूरी है।


एक्सिस बैंक के समूह कार्यकारी – होलसेल बैंक कवरेज, कॉर्पोरेट वेतन, वहनीयता और सीएसआर, विजय मुलबागल ने ज़ोर देकर कहा, “एक्सिस बैंक का मानना है कि क्षरित वन क्षेत्र को बहाल करना पर्यावरणीय ज़िम्मेदारी के साथ-साथ समुदाय के उत्थान पर केंद्रित अवसर भी है। पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली से जुड़े हमारे प्रयास जैव विविधता की रक्षा करने के साथ-साथ उन समुदायों की भी मदद करने के लिए तैयार किए गए हैं जो अपनी आजीविका के लिए इन पारिस्थितिकी तंत्रों पर निर्भर हैं। हम भारत के संवेदनशील क्षेत्रों में दीर्घकालिक स्तर पर कारगर, समुदाय को शामिल करने वाली पहलों के ज़रिये देश की जलवायु और जैव विविधता प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाकर स्थायी सामाजिक और पारिस्थितिकी मूल्य निर्माण करना चाहते हैं।”


इस कार्यक्रम के ज़रिये, एक्सिस बैंक की ’20 लाख वृक्ष लगाने का मिशन (मिशन 2 मिलियन ट्रीज़)’ पहल के तहत मसिरा साइट (उत्तरी शहडोल वन प्रभाग) में पहले किए गए बहाली के प्रयासों को भी आगे बढ़ाया जा रहा है। इस साइट पर 2022 से 2024 के बीच 100 हेक्टेयर के खराब हो चुके वन क्षेत्र को फिर से हरा-भरा बनाने के लिए स्थानीय प्रजाति के 75,000 पौधे लगाए गए थे। मौजूदा चरण का मुख्य उद्देश्य है, पौधों के जीवित रहने की दर को बढ़ाना और पारिस्थितिक स्थिरता हासिल करना है। इसके लिए कई तरह के उपाय किए जा रहे हैं, जैसे कि आक्रामक प्रजातियों को हटाना, लगाए गए पौधों की देखभाल करना, चेक डैम की मरम्मत करना, सौर ऊर्जा से चलने वाले पानी के पंप लगाना और पानी के कमी वाले महीनों के दौरान पौधों को समय-समय पर पानी देना।
साथ ही, बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व के मानपुर बफर क्षेत्र में भी बड़े पैमाने पर बहाली का एक और अभियान चलाया जाएगा। इस अभियान के तहत लगभग 400 हेक्टेयर क्षरित वन भूमि को बहाल करने का लक्ष्य रखा गया है, जिसके लिए अक्टूबर 2025 से मार्च 2030 के बीच लगभग 3,00,000 स्थानीय प्रजाति के पौधे लगाए जाएंगे। इस परियोजना में ‘लैंटाना कमारा ‘ को हटाना, जल संरक्षण के लिए ढांचों का निर्माण, नर्सरी स्थापित करना और वन्यजीवों की मदद तथा उनके हैबिटैट का दीर्घकालिक पुनरुद्धार सुनिश्चित करने के लिए सौर ऊर्जा से चलने वाली जल प्रणालियों को लगाना भी शामिल होगा।

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