शैलेश नामदेव/डिंडौरी। सुधार कागजों पर नहीं, जमीन पर दिखना चाहिए। इसी सख्त संदेश के साथ डिंडौरी कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया ने शाम के वक्त जिला मुख्यालय स्थित शासकीय चिकित्सालय का औचक निरीक्षण किया। बिना किसी पूर्व सूचना के पहुंचीं कलेक्टर को देख अस्पताल प्रबंधन और कर्मचारियों में हड़कंप मच गया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही और कछुआ गति से चल रहे निर्माण कार्यों पर संबंधित अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई।
निर्माण कार्यों में देरी पर सख्त अल्टीमेटम
अस्पताल परिसर में लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा कराए जा रहे नाले के निर्माण में गुणवत्ता की कमी और ढिलाई देख कलेक्टर ने कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि अप्रैल 2026 के अंत तक यह कार्य हर हाल में पूर्ण होना चाहिए। वहीं, नगर पालिका द्वारा निर्मित पुराने शौचालयों की बदहाली पर उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए उन्हें तत्काल दुरुस्त कर जनता के लिए खोलने का आदेश दिया।
दवाइयों और ऑक्सीजन बैकअप की जांच
कलेक्टर ने स्वयं फार्मासिस्ट उपेंद्र पाराशर और अरविंद मरावी के साथ स्टॉक रजिस्टर का मिलान किया। उन्होंने दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ ही निर्देश दिए कि आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर हमेशा रिफिल मोड में तैयार रहने चाहिए। इसके बाद उन्होंने ओपीडी, ओटी, ब्लड बैंक, लैब और आईसीयू का बारीकी से जायजा लिया।
मरीज की पीड़ा देख पिघला कलेक्टर का दिल
निरीक्षण के दौरान मानवीय संवेदना भी उभरकर सामने आई। पीएनसी (PNC) वार्ड में ग्राम देवरी अमरपुर की अनीता ठाकुर ने अपनी स्वास्थ्य समस्याओं से कलेक्टर को अवगत कराया। मरीज की पीड़ा सुनते ही उन्होंने मौके पर मौजूद डॉक्टरों को तत्काल प्रभावी उपचार के निर्देश दिए। कलेक्टर ने दो-टूक कहा कि मरीज की संतुष्टि ही अस्पताल की सफलता का असली पैमाना है।
इस औचक कार्रवाई में सिविल सर्जन डॉ. रमेश मरावी, एसडीएम भारती मेरावी, डिप्टी कलेक्टर प्रियांशी जैन सहित नगर पालिका व पीडब्ल्यूडी के अधिकारी उपस्थित रहे।


