New Nigam Mandal MP: मध्यप्रदेश की मोहन सरकार में निगम मंडलों की सूची बीते लंबे समय से अटकी हुई है, वही पद की आस लगाए बैठे नेता सूची का इंतजार कर रहे है, लेकिन सूची आने का फैसला तो नहीं हो पाया, पर अब मोहन सरकार ने नए निगम मंडल बनाने का फैसला जरूर कर लिया।
अब शराब बेंचेगी सरकार
दरअसल, प्रदेश के मुखिया डॉ. मोहन यादव सरकार ने आबकारी व्यवस्था को लेकर बड़ा निर्णय लिया है। प्रदेश में अब निजी हाथों के साथ-साथ सरकार खुद भी शराब दुकानों का संचालन करेगी। इसके लिए राज्य सरकार एक नया निगम-मंडल बनाने जा रही है, जो सीधे आबकारी विभाग के नियंत्रण में काम करेगा।
बनेगा नया मंडल, लगी मुहर
हाल ही में उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडलीय उप-समिति की बैठक में यह अहम फैसला लिया गया। इस नए निगम के गठन का उद्देश्य उन शराब दुकानों का सफल संचालन करना है, जिनमें निजी ठेकेदारों ने रुचि नहीं दिखाई है।
क्यों पड़ी नए निगम की जरूरत?
दरअसल, मध्य प्रदेश में शराब दुकानों की नीलामी के 12 दौर पूरे होने के बाद भी प्रदेश की 489 दुकानें नीलाम नहीं हो सकीं। बार-बार टेंडर जारी होने के बावजूद इन दुकानों को कोई खरीदार नहीं मिला। राजस्व की हानि को रोकने के लिए सरकार ने अब इन दुकानों को खुद चलाने का फैसला किया है। शुरुआती साल में यह नया निगम इन 489 दुकानों का प्रबंधन संभालेगा। आने वाले समय में बाजार की स्थिति को देखते हुए इन दुकानों की संख्या घटाई या बढ़ाई जा सकती है।
बनेगी नई गाइडलाइन
यह नया निगम पूरी तरह से आबकारी विभाग के निर्देशों पर काम करेगा। दुकानों के संचालन, स्टाफ की नियुक्ति और क्रियान्वयन के लिए सरकार जल्द ही एक अलग नीति और गाइडलाइन जारी करेगी। इससे न केवल सरकारी खजाने में राजस्व आएगा, बल्कि शराब की अवैध बिक्री पर भी लगाम लगने की उम्मीद है।
घाटे में चल रहे पुराने निगमों के बीच नया प्रयोग
मध्य प्रदेश में वर्तमान में 40 से अधिक निगम-मंडल हैं, जिनमें से कई निगम मंडलों की आर्थिक स्थिति खराब है। कई निगम तो बंद होने की कगार पर हैं या उनमें अध्यक्षों के पद खाली पड़े हैं। ऐसे में शराब बेचने के लिए बनाया जा रहा यह नया निगम कितना सफल होगा, यह तो आने वाला समय ही बताएगा। हालांकि जानकारों की माने तो यदि प्रबंधन सही रहा, तो यह सरकार के लिए मुनाफे का सौदा साबित हो सकता है।


