Amit Jogi Jail: छत्तीसगढ़ की राजनीति में भूचाल लाने वाले रामावतार जग्गी हत्याकांड में सोमवार को हाईकोर्ट ने अपना अंतिम फैसला सुना दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे और जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष अमित जोगी को अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही उन पर 1000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है, जिसे न भरने पर उन्हें 6 महीने की अतिरिक्त जेल काटनी होगी।
क्यों बदला 17 साल पुराना फैसला?
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस अरविंद वर्मा की विशेष खंडपीठ ने इस मामले में बेहद सख्त टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि जब किसी अपराध में सभी आरोपियों के खिलाफ एक जैसे सबूत हों, तो किसी एक के साथ अलग व्यवहार नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि रायपुर की निचली अदालत द्वारा 2007 में अमित जोगी को बरी करना तर्कसंगत नहीं था, क्योंकि बाकी 28 आरोपियों को उन्हीं सबूतों के आधार पर दोषी ठहराया गया था। कोर्ट ने अमित जोगी को तीन हफ्ते के अंदर सरेंडर करने का आदेश दिया है।
क्या था वो हत्याकांड?
यह मामला छत्तीसगढ़ के सबसे चर्चित राजनीतिक हत्याकांडों में से एक है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के तत्कालीन प्रदेश कोषाध्यक्ष और कारोबारी रामावतार जग्गी की 4 जून 2003 को रायपुर में सरेआम गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। जग्गी पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल के बेहद करीबी माने जाते थे। इस मामले में कुल 31 आरोपी थे। 2007 में विशेष अदालत ने अमित जोगी को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया था, जबकि अन्य 28 को सजा सुनाई थी। इसके बाद रामावतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने न्याय के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जहां से मामला वापस हाईकोर्ट पहुंचा।
क्या बोले सतीश जग्गी?
हाईकोर्ट के फैसले पर मृतक के बेटे सतीश जग्गी ने कहा है कि दो दशकों की लंबी और थका देने वाली कानूनी लड़ाई के बाद आज न्याय की जीत हुई है।
अमित जोगी का अगला कदम
अमित जोगी ने हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दी है। इससे पहले 2 अप्रैल को जब उन्हें दोषी करार दिया गया था, तब उन्होंने कहा था कि उन्हें अपना पक्ष रखने का पर्याप्त समय नहीं मिला। अब सबकी नजरें सर्वोच्च न्यायालय की सुनवाई पर टिकी हैं कि क्या अमित जोगी को वहां से कोई राहत मिलती है या उन्हें जेल की सलाखों के पीछे जाना होगा।


