MP Congress: मध्य प्रदेश कांग्रेस में शौक के लिए पद लेकर बैठने वाले नेताओं के दिन अब जाने वाले है। संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के लिए पीसीसी अब सख्त तेवर अपना रही है। क्योंकि प्रदेश के 71 जिला अध्यक्षों के कामकाज की अग्निपरीक्षा होने जा रही है। सूत्रों की मानें तो 15 से 18 अप्रैल के बीच होने वाली समीक्षा बैठकों में उन अध्यक्षों की छुट्टी की जा सकती है जो पिछले एक साल में उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे हैं।
दिल्ली की नजर, भोपाल में दंगल
सूत्रों के अनुसार कांग्रेस आलाकमान ने इस बार समीक्षा की प्रक्रिया को काफी गंभीर बनाया है। दिल्ली से वरिष्ठ नेताओं की निगरानी में एक विशेष पैनल तैयार कर मध्य प्रदेश भेजा जा रहा है। यह पैनल जिला अध्यक्षों के एक साल के कार्यकाल का मूल्यांकन करेगा। बता दें कि इन अध्यक्षों की नियुक्ति केंद्रीय पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट और फ्री-हैंड कार्यशैली के आधार पर की गई थी, लेकिन परिणाम उम्मीद के मुताबिक नहीं रहे।
फूल छाप कांग्रेसियों पर गिरेगी गाज!
पार्टी के अंदर यह सुगबुगाहट तेज है कि कई जिला अध्यक्षों को विपक्षी दल की फूल की खुशबू ज्यादा पसंद आ रही है। ऐसे भीतरघातियों और निष्क्रिय नेताओं को चिन्हित करने के लिए ही इस रिव्यू मीटिंग का आयोजन किया जा रहा है। पार्टी को अंदेशा है कि अंदरूनी गुटबाजी के कारण कई अध्यक्षों का मनोबल गिरा है, जिसे फिर से चार्ज करने की जरूरत है।
ब्लॉक अध्यक्षों का महाकुंभ
समीक्षा बैठकों के साथ ही कांग्रेस 17 अप्रैल को भोपाल के रविंद्र भवन में ब्लॉक अध्यक्षों का पहला बड़ा सम्मेलन करने जा रही है। इस सम्मेलन में सांसद, विधायक, जिला प्रभारी और संगठन महासचिवों को भी बुलाया गया है।
काम करो या पद छोड़ो
पार्टी ने साफ कर दिया है कि पंचायत स्तर पर संगठन खड़ा करने की जिम्मेदारी में जो भी अध्यक्ष विफल रहे हैं, उन्हें पद पर बने रहने का कोई हक नहीं है। 18 अप्रैल तक चलने वाले इस मंथन के बाद कांग्रेस की नई और आक्रामक टीम की तस्वीर साफ हो जाएगी।


