Nigam Mandal Suchi: मध्यप्रदेश की मोहन सरकार और भाजपा संगठन ने आखिरकार निगम-मंडलों, प्राधिकरणों और आयोगों में होने वाली राजनीतिक नियुक्तियों का फॉर्मूला तय कर लिया है। सूत्रों की मानें तो दिल्ली केंद्रीय नेतृत्व ने प्रस्तावित नामों पर अपनी अंतिम मुहर लगा दी है। अब किसी भी क्षण वल्लभ भवन से नियुक्तियों के आदेश जारी किए जा सकते हैं। इस सूची में सबसे ज्यादा पेंच भोपाल (BDA) और इंदौर विकास प्राधिकरण (IDA) को लेकर फंसा था, जिस पर अब आम सहमति बन गई है।
दिग्गजों के बीच खिंची तलवारें अब शांत
राजधानी भोपाल और मिनी मुंबई कहे जाने वाले इंदौर के विकास प्राधिकरणों के अध्यक्ष पद को लेकर सबसे ज्यादा खींचतान देखी गई। सूत्रों के अनुसार भोपाल विकास प्राधिकरण में चेतन सिंह का नाम चेयरमैन पद के लिए सबसे आगे चल रहा है। वही इंदौर विकास प्राधिकरण के लिए हरिनारायण यादव की ताजपोशी लगभग तय मानी जा रही है। इसके अलावा जबलपुर (JDA) के लिए संदीप जैन और देवास के लिए बहादुर मुकाती के नामों पर सहमति बन चुकी है।
उज्जैन और ग्वालियर पर सस्पेंस
हालांकि कई पदों पर नाम फाइनल हो चुके हैं, लेकिन उज्जैन विकास प्राधिकरण और ग्वालियर विकास प्राधिकरण को लेकर अभी भी अंतिम दौर की चर्चा शेष है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि उज्जैन में कुछ स्थानीय समीकरणों के चलते फैसला रुका हुआ है, जिसे अगले 24 से 48 घंटों में सुलझा लिया जाएगा।
ये चेहरे संभाल सकते हैं बड़ी जिम्मेदारी!
अनुसूचित जाति आयोग: इस आयोग की जिम्मेदारी के लिए कैलाश जाटव के नाम पर सहमति बनी है।
अनुसूचित जनजाति आयोग: इस आयोग के लिए भगत सिंह नेताम को कमान सौंपी जा सकती है।
युवा आयोग: इस आयोग में प्रवीण शर्मा नए अध्यक्ष बनाए जा सकते हैं।
अपैक्स बैंक: सहकारिता क्षेत्र के बड़े चेहरे महेंद्र सिंह यादव का नाम इस पद के लिए प्रमुखता से उभरा है।
लघु उद्योग निगम: वरिष्ठ नेता विनोद गोटिया का नाम यहां के लिए प्रस्तावित है।
मप्र वेयर हाउसिंग कार्पोरेशन: भंडारण व्यवस्था की कमान संजय नगाइच के हाथों में दी जा सकती है।
वित्त विकास निगम: पूर्व विधायक दीपक सक्सेना को इस निगम का नया मुखिया बनाया जा सकता है।
कोल विकास प्राधिकरण: पूर्व विधायक रामलाल रौतेल इस पद की दौड़ में सबसे आगे हैं।
कटनी विकास प्राधिकरण: शशांक श्रीवास्तव
ओरछा विकास प्राधिकरण: अखिलेश अयाची का नाम लगभग तय माना जा रहा है।
दिल्ली से आया ‘सिग्नल’
बताया जा रहा है कि प्रदेश भाजपा के शीर्ष नेताओं ने सूची की पूरी जानकारी केंद्रीय नेतृत्व को भेज दी थी, जहां से ग्रीन सिग्नल मिल चुका है। सात दिनों के अंदर नियुक्तियों के आदेश निकलने की खबर से उन कार्यकर्ताओं में भी उत्साह है जो लंबे समय से अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे।


