PM आवास में अव्यवस्था की हद—बिजली अधूरी, पाइपलाइन टूटी, नालियां जाम होने की कगार पर
संवाददाता कटनी — शहर के NKJ थाना के सामने स्थित पी.एन. शहरी आवास की मल्टी अब भ्रष्ट व्यवस्था और प्रशासनिक उदासीनता की जीती-जागती मिसाल बन चुकी है। 14 महीने बीत जाने के बाद भी यहां का विद्युत कार्य अधूरा पड़ा है, जबकि नगर निगम और जिम्मेदार अधिकारी आंख मूंदे बैठे हैं। ठेकेदार की मनमानी के चलते सैकड़ों रहवासी मूलभूत सुविधाओं के लिए जूझने को मजबूर हैं।मल्टी समिति के अध्यक्ष राकेश शुक्ला ने सीधे तौर पर आरोप लगाया है कि ठेकेदार जानबूझकर काम को लटका रहा है। सिर्फ 5 मजदूरों के सहारे काम चलाकर पूरे प्रोजेक्ट को मजाक बना दिया गया है। हालत यह है कि काम पूरा होने में अभी भी कई महीने लग सकते हैं, जबकि गरीब हितग्राही हर महीने किस्त भर रहे हैं।सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि विद्युत कार्य के दौरान पानी सप्लाई की पाइपलाइन को करीब 20 जगह तोड़ दिया गया। मरम्मत के नाम पर खानापूर्ति कर पाइप बंद कर दिए गए, लेकिन आज भी कई स्थानों पर पानी रिस रहा है। यह सब नगर निगम के कर्मचारियों की मौजूदगी में हुआ, फिर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई—जो सीधे तौर पर मिलीभगत की ओर इशारा करता है।इतना ही नहीं, परिसर की सड़कों और स्लीपर को तोड़कर उसी मलबे से भराई कर दी गई। नतीजा—नालियां गिट्टी और कचरे से पट चुकी हैं और पूरी ड्रेनेज व्यवस्था ठप होने के कगार पर है। अगर जल्द सफाई और सुधार नहीं हुआ तो यहां गंभीर जलभराव और गंदगी की स्थिति बन सकती है।रहवासियों का गुस्सा इस बात पर भी है कि फ्लैट आवंटित होने के बावजूद वे रहने लायक नहीं हैं। लोग एक तरफ EMI भर रहे हैं, दूसरी तरफ किराए के मकानों में रहने को मजबूर हैं। यानी गरीब परिवारों पर दोहरा आर्थिक बोझ डाला जा रहा है।प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी महत्वाकांक्षी योजना यहां अधिकारियों की लापरवाही और ठेकेदार की मनमानी के चलते पूरी तरह फेल होती नजर आ रही है। सवाल यह उठता है कि आखिर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई कब होगी?इस पूरे मामले में नगर निगम के उपयंत्री सुनील मिश्रा का गैर-जिम्मेदाराना बयान भी सामने आया है। उन्होंने कहा—“काम चल रहा है, समय लगता है।”यह बयान उन परेशान परिवारों के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है, जो पिछले 14 महीनों से बुनियादी सुविधाओं के लिए भटक रहे हैं।अब देखना होगा कि नगर निगम प्रशासन इस गंभीर लापरवाही पर कब जागता है या फिर रहवासी यूं ही ठेकेदार और सिस्टम की मनमानी का शिकार होते रहेंगे।


