मध्य प्रदेश की राजनीति में राज्यसभा चुनाव को लेकर सरगर्मी बढ़ गई है. अब तक यह माना जा रहा था कि प्रदेश में तीन सीटों पर ही चुनाव होंगे, लेकिन तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के नतीजे इस पूरे समीकरण को बदल सकते हैं. अगर केंद्रीय राज्यमंत्री एल. मुरुगन वहां से जीत दर्ज करते हैं, तो मध्य प्रदेश में एक और राज्यसभा सीट खाली हो सकती है, जिससे राजनीतिक गणित पूरी तरह नया रूप ले सकता है.
मध्यप्रदेश में होंगे राज्यसभा चुनाव
दरअसल, मध्य प्रदेश से राज्यसभा सांसद और केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन को भाजपा ने तमिलनाडु के तिरुप्पुर जिले की अविनाशी सीट से मैदान में उतारा है. भाजपा यहां अन्नाद्रमुक के साथ मिलकर चुनाव लड़ रही है. अविनाशी सीट को अन्नाद्रमुक का मजबूत गढ़ माना जाता है, जहां पिछले पांच चुनावों से लगातार जीत मिलती रही है. ऐसे में मुरुगन की जीत की संभावना काफी मजबूत मानी जा रही है.
कैसे होगा खेला
नियमों के मुताबिक, अगर कोई सांसद विधानसभा चुनाव जीतता है, तो उसे 14 दिनों के भीतर किसी एक सदन की सदस्यता छोड़नी होती है. यानी अगर मुरुगन विधायक बनते हैं, तो उन्हें राज्यसभा से इस्तीफा देना पड़ेगा. इससे मध्य प्रदेश की एक और सीट खाली हो जाएगी और छह महीने के अंदर वहां उपचुनाव कराना जरूरी होगा. फिलहाल भाजपा के जॉर्ज कुरियन और सुमेर सिंह सोलंकी, साथ ही कांग्रेस के दिग्विजय सिंह का कार्यकाल 21 जून 2026 को खत्म हो रहा है. इन तीन सीटों पर मई-जून में चुनाव होना तय है. लेकिन अगर मुरुगन इस्तीफा देते हैं, तो कुल सीटों की संख्या चार हो जाएगी.
भाजपा के पास कितने विधायक
विधानसभा की मौजूदा स्थिति देखें तो भाजपा के पास 163 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के पास प्रभावी रूप से 63 वोट ही बचे हैं. कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा का वोटिंग अधिकार सुप्रीम कोर्ट द्वारा खत्म किया जा चुका है, दतिया से विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त हो गई है और निर्मला सप्रे भाजपा में शामिल हो चुकी हैं. तीन सीटों की स्थिति में एक राज्यसभा सदस्य के लिए करीब 58 वोटों की जरूरत होती है. इस आधार पर भाजपा आसानी से दो सीटें जीत सकती है, जबकि कांग्रेस तीसरी सीट के लिए संघर्ष करेगी. लेकिन अगर चौथी सीट खाली होती है, तो प्रति सीट जरूरी वोट घटकर करीब 47 रह जाएंगे, जिससे पूरा चुनावी समीकरण बदल सकता है. फिर भी कांग्रेस के सामने चुनौती कम नहीं है. संख्या बल कमजोर होने के साथ क्रॉस वोटिंग का खतरा भी बना हुआ है. वहीं भाजपा इस स्थिति का फायदा उठाने की तैयारी में है. अब सबकी नजर 4 मई को आने वाले तमिलनाडु चुनाव परिणामों पर टिकी है, क्योंकि वहीं से तय होगा कि मध्य प्रदेश में मुकाबला तीन सीटों तक सीमित रहेगा या चौथी सीट से सियासी खेल और दिलचस्प हो जाएगा.
