Tuesday, November 3, 2026
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भारत के अगले क्रेडिट बूम को महिलाएं दे रही हैं गति

भारत का अगला क्रेडिट बूम पारंपरिक वर्गों से नहीं, बल्कि महिलाओं से संचालित हो सकता है, जो अब उधारकर्ता, उद्यमी और व्यवसाय निर्माता के रूप में आगे आ रही हैं। जो वर्ग कभी हाशिये पर था, वह अब देश की औपचारिक ऋण प्रणाली का केंद्र बनता जा रहा है।

नीति आयोग के अनुसार, आज महिलाएं भारत के कुल क्रेडिट बाजार का 76 लाख करोड़ रुपये यानी 26% हिस्सा रखती हैं। इस बढ़त को बढ़ती वित्तीय साक्षरता, उत्पादों के प्रति जागरूकता और आर्थिक स्वतंत्रता का समर्थन मिल रहा है, जिससे लगभग 45 करोड़ ऋण लेने-योग्य महिलाएं इस दायरे में शामिल हो रही हैं। 2017 से 2025 के बीच, क्रेडिट पैठ 19% से बढ़कर 36% हो गई, जबकि ऋण की मात्रा 4.8 गुना बढ़ी और 16 करोड़ महिलाएं औपचारिक ऋण प्रणाली में शामिल हुईं।

हालांकि, असली बदलाव इस बात में दिखता है कि ऋण का उपयोग कैसे किया जा रहा है। जहां रिटेल लोन अब भी प्रमुख हैं, वहीं सबसे तेज वृद्धि व्यवसायिक ऋणों में हो रही है। व्यवसायिक उद्देश्यों के लिए लिए गए ऋणों का हिस्सा 16% से बढ़कर 25% हो गया है। ऋण लेने वालों की संख्या में सालाना 31% की वृद्धि हुई है और 2017 के बाद से कुल बकाया राशि 7.5 गुना बढ़ी है। यह उपभोग-आधारित उधारी से उद्यम निर्माण की ओर बदलाव का संकेत है।

गोदरेज कैपिटल की मुख्य जोखिम अधिकारी शालिनी मिमानी कहती हैं, “महिलाओं को सही तरह की ऋण सुविधा और क्षमता निर्माण उपलब्ध कराना उनके उद्यमशीलता की पूरी क्षमता को सामने लाने के लिए बेहद जरूरी है। ध्यान इस बात पर होना चाहिए कि उन्हें विस्तार के अवसर मिलें, उनका आत्मविश्वास बढ़े और दीर्घकालिक वित्तीय मजबूती के रास्ते तैयार हों।”

डिजिटलीकरण इस बदलाव को और तेज कर रहा है। एक ही दिन में लोन स्वीकृति की दर 34% से बढ़कर 45% हो गई है, जबकि एनबीएफसी अपनी तेज़ और लचीली प्रक्रिया के कारण, खासकर पहली बार ऋण लेने वालों के लिए, पसंदीदा विकल्प बनते जा रहे हैं।

जैसे-जैसे महिलाएं केवल ऋण लेने से आगे बढ़कर व्यवसाय खड़ा करने की ओर बढ़ रही हैं, वे न सिर्फ विकास को गति दे रही हैं, बल्कि भारत की क्रेडिट अर्थव्यवस्था के भविष्य को भी नई दिशा दे रही हैं।

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