खबर डिजिटल संवाददाता कटनी– एक ओर जिला प्रशासन गेहूं खरीदी में रिकॉर्ड और उपलब्धियों के दावे कर रहा है, वहीं दूसरी ओर जिले के कई खरीदी केंद्रों की जमीनी हकीकत इन दावों पर सवाल खड़े करती नजर आ रही है। लगातार निरीक्षण और निर्देशों के बावजूद खरीदी केंद्रों में अव्यवस्थाएं कम होने का नाम नहीं ले रही हैं।सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जिले के कई खरीदी केंद्रों में खरीदे गए गेहूं का भारी स्टॉक जमा हो चुका है। केंद्रों में गेहूं की बोरियों के अंबार लगे हैं, लेकिन समय पर परिवहन और वेयरहाउस में भंडारण नहीं हो पा रहा है। खरीदी प्रभारियों का आरोप है कि केंद्रों से गेहूं लोड कर वाहन भेजने के बाद भी वेयरहाउस में गाड़ी प्रवेश कराने तक के लिए “घूस” देनी पड़ रही है। इसके बावजूद वाहनों में भेजे गए 100 से 150 बोरी तक माल रिजेक्ट कर दिया जाता है, जिससे प्रभारियों को आर्थिक और प्रशासनिक दबाव झेलना पड़ रहा है।इस अव्यवस्था का सीधा असर किसानों पर भी पड़ रहा है। गेहूं का भुगतान समय पर नहीं हो पाने से किसानों की राशि अटक रही है और उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। खरीदी केंद्रों में जगह कम पड़ने लगी है और खुले में रखे गेहूं पर मौसम की मार का खतरा मंडरा रहा है। पिछले कुछ दिनों से मौसम का मिजाज बदलने और बारिश होने से केंद्र प्रभारी भी चिंता में दिखाई दे रहे हैं।वहीं ढीमरखेड़ा क्षेत्र के लगभग 11 खरीदी केंद्रों की मैपिंग कटनी जिले से हटाकर जबलपुर से जोड़ दिए जाने के कारण भी व्यवस्थाएं प्रभावित हुई हैं। परिवहन, मॉनिटरिंग और समन्वय में दिक्कतें आने से केंद्रों में अव्यवस्था बढ़ने की बात सामने आ रही है।स्लीमनाबाद क्षेत्र के कुछ खरीदी केंद्रों में भी अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। किसानों का कहना है कि तौल के नाम पर प्रति तौल 2 किलो तक अतिरिक्त गेहूं लिया जा रहा है। मजबूरी में किसान विरोध भी नहीं कर पा रहे, क्योंकि उनकी सुनवाई करने वाला कोई नजर नहीं आ रहा।हालांकि कलेक्टर आशीष तिवारी लगातार खरीदी केंद्रों का दौरा कर व्यवस्थाएं सुधारने के निर्देश दे रहे हैं, लेकिन जमीनी हालात अब भी गंभीर बने हुए हैं। किसानों और खरीदी प्रभारियों का कहना है कि यदि जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले दिनों में समस्या और विकराल रूप ले सकती है।
कटनी से सौरभ श्रीवास्तव की रिपोर्ट मो. 9131308097
