डिंडोरी /खबर डिजिटल /शैलेश नामदेव/ डिंडोरी जिले में इन दिनों स्कूलों और कॉलेजों में बांटी गई कुर्सी-टेबल को लेकर पॉलिटिक्स गरमा गई है। कांग्रेस विधायक ओमकार सिंह मरकाम द्वारा बांटी गई कुर्सी-टेबल पर भाजपा ने सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला केवल कुर्सी-टेबल वितरण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें भ्रष्टाचार, फिजूलखर्ची और सरकारी पैसे से निजी प्रचार के गंभीर आरोप शामिल हैं।
कुर्सी-टेबल पर नाम और भारी-भरकम बजट.. विवाद की मुख्य वजह
विधायक निधि से जिले के 4 कॉलेजों और 19 स्कूलों में लगभग 1,000 सेट कुर्सी-टेबल भेजे गए हैं। विवाद तब शुरू हुआ जब इन सामग्रियों की कीमत और उन पर लिखे नाम सामने आए। वितरित की गई टेबल के सामने और ऊपर विधायक का पूरा नाम बड़े अक्षरों में लिखा गया है। भाजपा जिला अध्यक्ष चमरू सिंह नेताम का कहना है कि विधायक शिक्षा की आड़ में युवाओं के बीच अपना व्यक्तिगत प्रचार कर रहे हैं।

सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, एक सेट (कुर्सी और टेबल) की कीमत 23,650 रुपये दिखाई गई है। इसके उलट, जब स्थानीय फर्नीचर व्यापारियों से जानकारी ली गई, तो उन्होंने बताया कि इसी तरह की कुर्सी-टेबल बाजार में मात्र 4,200 से 4,500 रुपये में आसानी से मिल जाती है। हैरानी की बात यह है कि जहाँ कुछ कॉलेजों में सामान पहुँच चुका है, वहीं कई कॉलेजों के प्राचार्यों ने स्पष्ट किया कि उन्होंने कभी इन कुर्सियों की मांग ही नहीं की थी।
चंद्र विजय कॉलेज और आदर्श कॉलेज के प्राचार्यों ने बताया कि उनके यहाँ अभी तक सामान नहीं पहुँचा है और उन्हें फर्नीचर से ज्यादा लैब और लाइब्रेरी के उपकरणों की जरूरत थी।वहीं, समनापुर कॉलेज में 29 अप्रैल को 100 सेट की सप्लाई दी जा चुकी है।
आरोपों पर सफाई देते हुए विधायक ओमकार सिंह मरकाम ने कहा कि उन्होंने यह कदम छात्रों की समस्या को देखते हुए उठाया है। उन्होंने
भाजपा सरकार पर भेदभाव का आरोप लगाते हुए कहा ”छात्रों ने मुझसे बैठने की व्यवस्था न होने की शिकायत की थी, इसलिए मैंने अपनी निधि से मदद की। नाम लिखना मेरा संवैधानिक अधिकार है। भाजपा के नेता केवल आरोप लगाना जानते हैं, जबकि मुख्यमंत्री अपने विधायकों को मनमाना फंड दे रहे हैं।

वितरण का विवरण:
शिक्षण संस्थान आवंटित कुर्सी-टेबल (सेट)
आदर्श कॉलेज और चंद्र विजय कॉलेज 100 – 100 सेट
समनापुर और करंजिया कॉलेज 100 – 100 सेट
विभिन्न उत्कृष्ट विद्यालय 25 से 50 सेट
कुल वितरण लगभग 1,000 सेट
भाजपा जिला अध्यक्ष चमरू सिंह नेताम ने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की बात कही है। उनका तर्क है कि चुनाव के समय जब आचार संहिता लगेगी, तो इन कुर्सियों पर लिखे विधायक के नाम को मिटाने या ढंकने के लिए सरकार को अलग से पैसा खर्च करना पड़ेगा।
फिलहाल, 23 हजार रुपये की एक कुर्सी-टेबल का सेट यह मामला डिंडोरी की गलियों से लेकर सोशल मीडिया तक चर्चा का विषय बना हुआ है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इन आरोपों पर क्या रुख अपनाता है।
