मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रालय में हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में प्रदेश के विकास और जनकल्याण से जुड़े कई बड़े फैसलों पर मुहर लगी. सरकार ने स्वास्थ्य, सड़क, सिंचाई और सामाजिक सुरक्षा जैसी अहम योजनाओं के लिए 29 हजार 540 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि मंजूर की है. इन निर्णयों का उद्देश्य प्रदेश में बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करना और आम लोगों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराना है.
मोहन कैबिनेट में फैसला
बैठक में लोक वित्त पोषित योजनाओं और परियोजनाओं के परीक्षण व संचालन के लिए 15 हजार 598 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई. यह राशि 16वें वित्त आयोग की अवधि यानी 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक विभिन्न योजनाओं के संचालन में खर्च होगी. इसमें कोषालयों की स्थापना, लंबित देनदारियों के भुगतान, लेखा प्रशिक्षण संस्थानों, विभागीय परिसंपत्तियों के रखरखाव और आईटी परियोजनाओं के लिए भी बजट शामिल है.
सड़क नेटवर्क को बेहतर बनाया जाएगा
प्रदेश में सड़क नेटवर्क को बेहतर बनाने के लिए भी सरकार ने बड़ा फैसला लिया. शहरी और नगरीय मार्गों के निर्माण, उन्नयन और सुदृढ़ीकरण के लिए 6 हजार 900 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं. इसमें 2,100 करोड़ रुपये नए मार्गों और उन्नयन कार्यों पर खर्च होंगे, जबकि 4,800 करोड़ रुपये सड़कों को मजबूत बनाने में लगाए जाएंगे. गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले बुजुर्गों के लिए संचालित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना को भी अगले पांच वर्षों तक जारी रखने की मंजूरी दी गई है. इसके लिए 6 हजार 115.99 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं. योजना के तहत पात्र वृद्धजनों को हर महीने 600 रुपये की पेंशन मिलती रहेगी.
नए मेडिकल कॉलेज की स्थापना को लेकर भी अहम फैसला
सीहोर जिले के बुदनी में नए मेडिकल कॉलेज की स्थापना को लेकर भी अहम फैसला हुआ. सरकार ने एमबीबीएस, नर्सिंग और पैरामेडिकल कॉलेज के निर्माण के लिए 763.40 करोड़ रुपये की संशोधित प्रशासनिक स्वीकृति दी है. यहां 100 सीटों वाला मेडिकल कॉलेज, 500 बिस्तरों का अस्पताल, 60 सीटों का नर्सिंग कॉलेज और 60 सीटों का पैरामेडिकल कॉलेज बनाया जाएगा.
नीमच जिले की खुमानसिंह शिवाजी जलाशय सूक्ष्म सिंचाई परियोजना के लिए 163.95 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं. इस परियोजना से 22 गांवों की करीब 5,200 हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा मिलेगी. इसके अलावा राज्य मंत्रियों द्वारा दिए जाने वाले स्वेच्छानुदान की सीमा भी 16 हजार रुपये से बढ़ाकर 25 हजार रुपये कर दी गई है. मंत्रि-परिषद ने सड़क निर्माण कार्यों को गति देने के लिए भी राहत भरे निर्णय लिए हैं. 10 करोड़ रुपये से कम लागत वाले डामरीकरण कार्यों में मूल्य समायोजन की अनुमति दी गई है ताकि बिटुमेन की बढ़ती कीमतों का असर ठेकेदारों पर कम पड़े. वहीं MPRDC की EPC और HAM परियोजनाओं में मूल्य समायोजन अब त्रैमासिक की बजाय हर महीने किया जाएगा. सरकार का मानना है कि इससे निर्माण कार्य समय पर पूरे हो सकेंगे और सड़क परियोजनाओं में तेजी आएगी.
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