FAI के महानिदेशक डॉ. एस.के. चौधरी ने कहा कि यदि 20% पोषक तत्वों की पूर्ति जैव-उर्वरकों से की जाए, तो कृषि क्षेत्र से होने वाले ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में 40% तक कमी लाई जा सकती है।
उन्होंने उद्योग जगत से उत्पादन बढ़ाने, गुणवत्ता सुनिश्चित करने और क्षेत्र-विशिष्ट सूक्ष्मजीवी उत्पाद विकसित करने का आह्वान किया।
यह वक्तव्य पोर्ट ब्लेयर में आयोजित FAI के चार दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान दिया गया, जिसमें 15 कंपनियों एवं संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल हैं।
नई दिल्ली: द फर्टिलाइज़र एसोसिएशन ऑफ इंडिया (FAI) के महानिदेशक डॉ. सुरेश कुमार चौधरी ने कहा कि जैव-उर्वरकों में भारत की आयातित रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने की बड़ी क्षमता है। पोर्ट ब्लेयर में आयोजित FAI के प्रशिक्षण कार्यक्रम “कृषि स्थिरता के लिए जैव-उर्वरक” को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि यदि पोषक तत्वों की पूर्ति में 20% हिस्सेदारी जैव-उर्वरकों की हो, तो खेतों से होने वाले ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में 40% तक कमी लाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि नाइट्रस ऑक्साइड जैसी गैसों के उच्च ग्लोबल वार्मिंग प्रभाव को देखते हुए जैव-उर्वरकों का उपयोग जलवायु परिवर्तन से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
डॉ. चौधरी ने कहा कि रासायनिक उर्वरकों, जैव-उर्वरकों और जैविक संसाधनों के संतुलित उपयोग पर आधारित “इंटीग्रेटेड न्यूट्रिएंट मैनेजमेंट” ही मिट्टी की सेहत और दीर्घकालिक कृषि उत्पादकता बनाए रखने का वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित तरीका है। उन्होंने बताया कि देश में पिछले छह दशकों से चल रहे दीर्घकालिक उर्वरक परीक्षणों ने इस तथ्य को साबित किया है।
उन्होंने उद्योग जगत से तीन प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान देने की अपील की – उत्पादन क्षमता बढ़ाना, निर्माण से लेकर किसानों तक गुणवत्ता बनाए रखना और विभिन्न क्षेत्रों की मिट्टी एवं जलवायु के अनुसार विशेष सूक्ष्मजीवी फॉर्मुलेशन विकसित करना। उन्होंने कहा कि जैव-उर्वरकों की प्रभावशीलता क्षेत्र विशेष की परिस्थितियों पर निर्भर करती है, इसलिए इनके लिए एक समान मॉडल कारगर नहीं हो सकता। “कृषि स्थिरता के लिए जैव-उर्वरक” विषय पर आयोजित यह चार दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम 11 से 14 मई 2026 तक पीयरलेस रिज़ॉर्ट, कॉर्बिन्स कोव, पोर्ट ब्लेयर में आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम में ICAR के वैज्ञानिकों, उर्वरक उद्योग प्रतिनिधियों और सरकारी अधिकारियों सहित 15 कंपनियों एवं संस्थानों के प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं।