उत्तर प्रदेश में नौकरीपेशा लोगों के लिए आने वाले दिनों में काम करने का तरीका बदल सकता है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अब प्रदेश में वर्क फ्रॉम होम को बढ़ावा देने की तैयारी में हैं. सरकार की योजना है कि बड़ी कंपनियों, आईटी सेक्टर, स्टार्टअप्स और ज्यादा कर्मचारियों वाले संस्थानों में हफ्ते में दो दिन घर से काम करने की व्यवस्था लागू की जाए. इसे लेकर जल्द ही राज्य सरकार की ओर से एडवाइजरी जारी होने की संभावना है.
घर से काम करने की अपील
सरकार फिलहाल उन संस्थानों पर ज्यादा ध्यान दे रही है जहां हजारों कर्मचारी एक साथ काम करते हैं. इसमें आईटी कंपनियां, कॉर्पोरेट ऑफिस, बड़ी प्राइवेट कंपनियां, इंडस्ट्रियल यूनिट्स और स्टार्टअप्स शामिल हैं. ऐसे संस्थानों को सलाह दी जाएगी कि वे कर्मचारियों को सप्ताह में कम से कम दो दिन वर्क फ्रॉम होम की सुविधा दें.
ट्रैफिक की समस्या होगी कम
सरकार का मानना है कि इस कदम से ट्रैफिक की समस्या काफी हद तक कम हो सकती है. साथ ही पेट्रोल और डीजल की बचत होगी और प्रदूषण पर भी नियंत्रण पाने में मदद मिलेगी. रोज लंबा सफर करने वाले कर्मचारियों को भी राहत मिलेगी और उनका समय बचेगा.
सार्वजनिक परिवहन का ज्यादा इस्तेमाल करने की अपील
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लोगों से सार्वजनिक परिवहन का ज्यादा इस्तेमाल करने की भी अपील की है. उन्होंने कहा कि जिन शहरों में मेट्रो की सुविधा उपलब्ध है, वहां लोगों को निजी वाहनों की जगह मेट्रो से यात्रा करनी चाहिए. इसके अलावा रोडवेज बसों और कार पूलिंग को भी बढ़ावा देने की बात कही गई है.
सरकारी दफ्तरों में भी कई बदलाव
सरकारी दफ्तरों में भी कई बदलाव करने की तैयारी है. मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि सरकारी विभागों की आधी आंतरिक बैठकें ऑनलाइन मोड में आयोजित की जाएं. इसके अलावा सेमिनार, कॉन्फ्रेंस और वर्कशॉप को भी वर्चुअल तरीके से आयोजित करने पर जोर दिया गया है. स्कूल और कॉलेजों को भी डिजिटल बैठकों को बढ़ावा देने के निर्देश दिए गए हैं.
‘नो व्हीकल डे’ मनाने का सुझाव
सरकार ने हफ्ते में एक दिन ‘नो व्हीकल डे’ मनाने का सुझाव भी रखा है. मुख्यमंत्री ने मंत्रियों, सांसदों, विधायकों और सरकारी अधिकारियों से अपील की है कि वे सप्ताह में कम से कम एक दिन सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करें ताकि समाज में सकारात्मक संदेश जाए.
ईंधन बचत के लिए करना होगा ये काम
सरकार का कहना है कि यह पहल सिर्फ ईंधन बचत तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य की जरूरतों और बेहतर शहरी व्यवस्था को ध्यान में रखकर की जा रही है. अगर यह योजना लागू होती है तो उत्तर प्रदेश में काम करने और सफर करने का तरीका काफी बदल सकता है.
