Monday, November 2, 2026
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कटनी में मिला सोने का जखीरा! ‘कनकपुरी’ बनने की ओर जिला, 5 हजार लोगों को मिलेगा रोजगार, युवाओं को मिलेगा रोजगार

कटनी।  मध्य प्रदेश का कटनी जिला अब सिर्फ चूना पत्थर और बॉक्साइट के लिए ही नहीं, बल्कि सोना-चांदी के संभावित भंडार के कारण भी सुर्खियों में है। जिले के स्लीमनाबाद सहित कई इलाकों में गोल्ड ब्लॉक की नीलामी हो चुकी है। उत्पादन शुरू होते ही कटनी की पहचान नई ऊंचाई पर पहुंच सकती है और हजारों लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है।

कटनी की धरती में छिपा है बहुमूल्य खजाना

कटनी जिले की धरती के नीचे बहुमूल्य धातुओं का विशाल भंडार होने के संकेत मिले हैं। भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण की रिपोर्ट के अनुसार कनकपुरी, पिपरिया और अमिलिया क्षेत्रों में सोना और चांदी के महत्वपूर्ण भंडार मौजूद हैं। रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि यहां 500 टन से अधिक सोना और करीब 1000 टन चांदी होने की संभावना है। यह खोज आधुनिक ड्रोन मैपिंग और जियोफिजिकल सर्वे के जरिए की गई है।

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इमलिया गांव में गोल्ड ब्लॉक की नीलामी पूरी

स्लीमनाबाद क्षेत्र के इमलिया गांव में 6.1 हेक्टेयर क्षेत्रफल में स्थित गोल्ड ब्लॉक की नीलामी पूरी हो चुकी है। माइनिंग अधिकारी रत्नेश दीक्षित के मुताबिक जिला प्रशासन ने आवश्यक अनुमति दे दी है और अब केवल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की मंजूरी का इंतजार है। अनुमति मिलते ही उत्पादन शुरू कर दिया जाएगा। इस परियोजना के पहले चरण में लगभग 200 करोड़ रुपये के निवेश का प्रावधान है। आधुनिक मशीनों और पर्यावरण-अनुकूल तकनीक का उपयोग किया जाएगा।

5 हजार से ज्यादा युवाओं को रोजगार का अवसर

खनन परियोजना के शुरू होने से कटनी और आसपास के क्षेत्रों के युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर खुलेंगे। अधिकारियों के अनुसार 5,000 से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे। स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता देने के साथ ट्रेनिंग सेंटर भी खोले जाएंगे, ताकि तकनीकी दक्षता विकसित की जा सके। इससे कटनी, जबलपुर, सतना और पन्ना जैसे जिलों की अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी।

राजस्व बढ़ेगा, ‘मालवा गोल्ड’ बन सकता है नया ब्रांड

कटनी जिले का मौजूदा खनन राजस्व करीब 1,200 करोड़ रुपये सालाना है। सोना-चांदी के उत्पादन के बाद इसमें बड़ा इजाफा होने की संभावना है। अनुमान है कि सरकार को अतिरिक्त 500 करोड़ रुपये का राजस्व मिल सकता है। यह राशि सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के विकास में उपयोग की जा सकती है। यदि परियोजना सफल रही तो कटनी का सोना ‘मालवा गोल्ड’ के रूप में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई पहचान बना सकता है।

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